शहजादपुर। शरीर में फोलिक एसिड की कमी के कारण एनीमिया होता है। इसकी कमी होने से कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं खड़ी हो जाती हैं। अगर समय रहते इस ओर ध्यान दिया जाए तो उन समस्याओं से बचा जा सकता है। महिलाएं और किशोरियां जागरूकता के अभाव में एनीमिया की शिकार हो जाती हैं। यह जानकारी सीएचसी शहजादपुर के एसएमओ डॉ. तरुण प्रसाद ने दी।
उन्होंने कहा कि रक्त में लाल कोशिकाओं के नष्ट होने की दर, उनके निर्माण की दर से अधिक होती है तब एनीमिया तब होता है। गर्भवती महिलाओं को बढ़ते शिशु के लिए भी रक्त निर्माण करना पड़ता है इसलिए उनको एनीमिया होने की संभावना अधिक रहती है। इसके कारण महिलाओं को अन्य बीमारियां होने की संभावना और बढ़ जाती है। एनीमिया से पीड़ित महिलाओं की प्रसव के दौरान मौत होने की संभावना अधिक होती है। उन्होंने बताया कि हमारे शरीर में हिमोग्लोबिन एक ऐसा तत्व है जो शरीर में खून की मात्रा बताता है। पुरुषों में इसकी मात्रा 12 से 16 प्रतिशत तथा महिलाओं में 11 से 14 के बीच होना चाहिए। उन्होंने लक्षण बताते हुए कहा कि त्वचा का सफेद दिखना, जीभ, नाखूनों और पलकों के अंदर सफेदी, कमजोरी व अधिक थकावट, चक्कर आना, बेहोश होना, सांस फूलना, हृदयगति का तेज होना, चेहरे व पैरों पर सूजन दिखाई देना शामिल हैं।
कारण
सबसे प्रमुख कारण लौह तत्व वाली चीजों का उचित मात्रा में सेवन न करना। किसी भी कारण रक्त में कमी, शरीर से खून निकलना (दुर्घटना, चोट, घाव आदि में अधिक खून बहना), शौच, उल्टी, खांसी के साथ खून का बहना, माहवारी में अधिक मात्रा में खून जाना, पेट के कीड़ों व परजीवियों के कारण खूनी दस्त लगना, पेट के अल्सर से खून जाना, बार-बार गर्भ धारण करना।
उपचार तथा रोकथाम
अगर एनीमिया मलेरिया या परजीवी कीड़ों के कारण है तो पहले उनका इलाज करें। लौह तत्व युक्त चीजों का सेवन करें। विटामिन ए व सी युक्त खाद्य पदार्थ खाएं। गर्भवती महिलाओं व किशोरी लड़कियों को नियमित रूप से 100 दिन तक लौह तत्व व फॉलिक एसिड की एक गोली रोज रात को खाना खाने के बाद लेनी चाहिए। जल्दी-जल्दी गर्भधारण से बचना चाहिए। भोजन के बाद चाय के सेवन से बचें क्योंकि चाय भोजन से मिलने वाले जरूरी पोषक तत्वों नष्ट करती है। काली चाय व कॉफी पीने से बचें। संक्रमण से बचने के लिए स्वच्छ पेयजल ही इस्तेमाल करें। स्वच्छ शौचालय का प्रयोग करें, खाना लोहे की कड़ाही में पकाएं।
फोलिक एसिड
शरीर में स्वस्थ लाल रक्त कण बनाने के लिए फोलिक एसिड की आवश्यकता होती है। गहरे हरे रंग की पत्तेदार सब्जियां, मूंगफली, अंडे, कुकुरमुत्ता (मशरूम), मटर व फलियां, चोकर वाला आटा, आलू, दालें, सूखे मेवे, मछली, मांस, बाजरा, गुड़, गोभी, शलजम, अनानास, अंकुरित दालों व अनाजों का नियमित प्रयोग करें।