दिल्ली से आने वाले किसानों का स्वागत करने के लिए शंभू बॉर्डर पर जमा किसान।
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अंबाला सिटी। शंभू बॉर्डर पर शनिवार को उत्सव का माहौल था। सुबह नौ बजे ही किसानों का एक बड़ा काफिला महिला किसानों के साथ दिल्ली की ओर से आने वाले किसानों के स्वागत के लिए यहां पहुंच गया। केंद्र सरकार की ओर से कृषि कानूनों को वापस वापस लिए जाने की खुशी में यहां पहुंचे सभी किसानों के चेहरे खिले हुए थे। दिल्ली से यहां पहुंच रहे किसानों का पुष्प वर्षा के साथ भव्य स्वागत किया गया।
सुबह साथ में पहुंचे ढोली ने जैसे ही किसानों के कहने पर ढोल पर थाप मारनी शुरू की तो सभी किसानों में एक अलग ही जोश भर गया। न केवल युवा किसान बल्कि महिलाएं और बच्चों ने भी भंगड़ा, गिद्दा बोली पानी शुरू कर दी। एक बार शुरू हुआ भंगड़े-गिद्दे का सिलसिला नए किसानों के आने के साथ-साथ देर रात तक जारी रहा।
किसानों के स्वागत के लिए शंभू बॉर्डर पर विशेष रूप से जलेबी के लंगर की व्यवस्था की गई, दोपहर के समय जो भी किसान शंभू बॉर्डर पर आ रहा था, उन्हें जलेबी का लंगर बांटा गया। इसके अलावा सब्जी, प्रसादा, चावल, चाय का लंगर भी पहले की तरह जारी है। शंभू बॉर्डर से थोड़ी पहले ही नाडा साहिब के पास से आए किसानों ने पकौड़ों और चाय का लंगर लगाया गया। जो भी किसान शंभू बॉर्डर पहुंचता उनका फूल की बरसात के साथ स्वागत किया जाता है। फूलों के साथ विशेष रूप से आए डमी जहाज की मदद से किसानों पर चमकीले कागजों की बरसात की गई। शाम करीब साढ़े चार बजे गायक रेशम सिंह अनमोल ने गीतों से समां बांध दिया। इस दौरान भी किसानों ने खूब डांस किया और यह कार्यक्रम देर शाम तक जारी रहा।
ऐसा दृश्य केवल अंबाला की तरफ ही नहीं बल्कि पंजाब की ओर भी नजर आया। यहां लड्डू बांटने के साथ ही सभी किसानों पर फूलों की वर्षा की गई। वहीं प्रवेश द्वार को भी विशेष रूप से सजाने का कार्य किया गया और लंगर को लेकर भी विशेष टेंट इत्यादि की व्यवस्था की गई। शंभू बॉर्डर पर कमान संभाल रहे किसान वजिंद्र सिंह ने बताया कि जब कि किसानों के दिल्ली की ओर से आने का सिलसिला जारी रहेगा उनका लंगर भी ऐसे ही शंभू बॉर्डर पर जारी रहेगा।