योगेंद्र मोहन शर्मा
नारायणगढ़। यूक्रेन पर रूसी हमले की बढ़ती आशंकाओं के चलते वहां मेडिकल की शिक्षा ग्रहण रहे भारत के छात्रों का भविष्य असमंजस में फंस गया है। हमले की आशंका को देखते हुए भारत सरकार की ओर सेे शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों को यूक्रेन छोड़ वापस भारत आने के आदेश देने से नारायणगढ़ और आसपास क्षेत्रों वे परिवार पशोपेश में हैं जिनके बच्चे वहां पढ़ाई कर रहे हैं। इन हालात में सबसे ज्यादा परेशान वे छात्र हैं जिनकी एक माह, दो माह या फिर साल भर बाद मेडिकल की पढ़ाई पूरी होने वाली है।
नारायणगढ़ के करीब एक दर्जन से अधिक छात्र यूक्रेन में मेडिकल की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें से कुछ ऐसे हैं जिनकी डॉक्टर की पढ़ाई कुछ महीनों में पूरी होने वाली है। कई छात्र तो ऐसे भी जो पिछले साल नवंबर में ही पढ़ाई करने के लिए गए हैं। वहां के विश्वविद्यालय ने उनके दस्तावेज भी अपने पास रख लिए हैं। फिलहाल दस्तावेज देने से भी साफ तौर पर इंकार कर दिया है। इन छात्रों के पास अब इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह गया है। छात्रों के अभिभावक मांग कर रहे हैं कि छात्रों को सरकार अपने खर्चे पर वापस लाए और विश्वविद्यालय से उनके सभी दस्तावेज भी इन्हें दिलवाए ताकि उनका भविष्य खराब न हो।
दो महीने बाद बन जाना था डॉक्टर, अब बनी है अनिश्चितता
छात्र नमन बंसल के पिता विजय बंसल ने बताया कि उनका पुत्र वर्ष 2016 में यूक्रेन में मेडिकल की शिक्षा प्राप्त करने गया था। उसकी अंतिम परीक्षा अप्रैल 2022 में होनी थी। उसने अपना कोर्स कर मई 2022 में वापस घर आ जाना था। विजय बंसल ने बताया कि भारतीय दूतावास से प्राप्त आदेशों के अनुसार अब उसका पुत्र नमन बंसल दो या तीन दिन में घर लौटने वाला है। अब नमन की शेष पढ़ाई बारे अनिश्चितता सी बनी हुई है। उन्होंने बताया कि भारत आने वाले इन छात्रों से हवाई जहाज का दो से तीन गुना ज्यादा किराया लिया जा रहा है।
20 दिन बाद ही वापस लौटने को मजबूर हर्ष
अधिवक्ता लाजपत सिंह ने बताया कि उनका हर्ष 2017 में यूक्रेन में मेडिकल की शिक्षा प्राप्त करने गया था। वह अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए यूक्रेन से घर आया था। आठ फरवरी को ही यूक्रेन वापस गया था। भारत सरकार के आदेश जारी होने के बाद उसे 20 दिन बाद ही वापस लौटना पड़ रहा है। ऐसे में उसकी पढ़ाई बीच में ही छूट जाएगी।
यूक्रेन यूनिवर्सिटी दस्तावेज नहीं कर रही वापस
बलदीप मान ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे जशन मान को नवंबर 2021 में मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए यूक्रेन भेजा था। बेटे को यूक्रेन भेजने के लिए उन्होंने बड़ी की मुश्किल से रुपयों का इंतजाम किया था। अब उनके बेटे को मजबूरी में वापस आना पड़ रहा है। इस बात की सूचना मिलने के बाद से वह पूरी तरह परेशान हैं। उनके बेटे ने फोन पर बताया कि यूक्रेन की यूनिवर्सिटी ने उसके सभी प्रमाणपत्र आदि अपने पास ही रख लिए हैं। प्रमाणपत्र वापस नहीं दिए जा रहे हैं। इससे अब पूरी तरह से दुविधा में फंसे हुए हैं। बिना दस्तावेजों के उसे आगे कहीं भी दाखिला नहीं मिल पाएगा।
एक साल बाद पढ़ाई पूरी कर वापस आ जाता अभिषेक
प्रवीण वर्मा ने बताया कि उनका पुत्र अभिषेक वर्मा भी वर्ष 2017 में यूक्रेन में मेडिकल की शिक्षा प्राप्त करने के लिए गया था। उन्हें उम्मीद थी कि एक वर्ष बाद अपने छह वर्ष का कोर्स पूरा कर उनका बेटा डॉक्टर बनकर अपने देश भारत वापस आ जाएगा और देश की सेवा करेगा। भारतीय छात्रों द्वारा यूक्रेन छोड़ने की भारत सरकार द्वारा की गई घोषणा ने उसके सभी अरमानों पर पानी सा फिर गया है।
पढ़ाई बीच में छोड़ दोनों बच्चे लौट रहे वापस
गांव हुसैनी के रणबीर सिंह ने बताया कि वह सेना से 2010 में सेवानिवृत्त हुए थे, उनके बेटा व बेटी दोनों ही यूक्रेन में मेडिकल की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। जिन्हें अब सरकार के आदेशानुसार अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ आना पड़ रहा है। उनकी पुत्री आरजू गिल वर्ष 2017 में तथा उनका पुत्र अंकित गिल नवंबर 2021 में यूक्रेन में मेडिकल की शिक्षा प्राप्त करने के लिए गए थे। दोनों अब मजबूरन भारत वापस आना पड़ रहा है।