फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ambala News: सीआईएसएफ की जवान के समर्थन में किसानों की सभा आज

विज्ञापन
विज्ञापन
अंबाला सिटी। चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर अभिनेत्री और नवनिर्वाचित लोकसभा सदस्य कंगना रनौत से जुड़ा थप्पड़ प्रकरण अभी शांत ही नहीं हुआ है। इसमें किसान पहले दिन से थप्पड़ लगाने वाली सीआईएसएफ की महिला जवान के साथ हैं। हाल ही में शंभू मोर्चे से किसान नेता महिला जवान के घर पर भी गए थे और वहां से वीडियो जारी कर बताया था कि जवान का पूरा परिवार सेना में है।
विज्ञापन

इसके बाद अब जब महिला जवान पर कार्रवाई की है तो किसान नेताओं ने रविवार को मोहाली के गुरुद्वारा अंब साहिब में सभी किसान संगठनों की बैठक बुलाई है। सुबह 10 बजे यह बैठक शुरू होगी। इसमें शामिल होने के लिए अंबाला सिटी के खन्ना फार्म से भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के किसान नेता भी मोहाली के लिए जत्थेबंदियों के साथ रवाना होंगे।
बैठक के बाद मोहाली एसपी कार्यालय में पहुंचकर किसान नेता मांग करेंगे कि महिला जवान पर जो भी कार्रवाई की गई तो उसे रद्द किया जाए। अगर निलंबन किया है तो वापस लिया जाए और एफआईआर दर्ज की जा रही है तो उसे न किया जाए। किसान नेता जय सिंह जलबेड़ा का कहना है इस मामले को अनावश्यक तूल दिया है। फिलहाल महिला जवान की कोई गलत नहीं दिखाई दे रही है।
विज्ञापन

गुरकीरत को जमानत, अब नवदीप के लिए प्रयास शुरू
किसान आंदोलन में उपद्रव करने के मामले में मोहाली एयरपोर्ट से गिरफ्तार नवदीप जलबेड़ा के साथी किसान गुरकीरत को जमानत मिल गई है। जेल से बाहर आने के बाद गुरकीरत ने किसान नेताओं से मुलाकात की। इसके बाद अब किसान नेता नवदीप जलबेड़ा की जमानत के लिए कोशिश करते दिखाई देंगे। इससे पहले एक किसान नेता को पहले ही जमानत पर छोड़ा जा चुका है। गौरतलब है कि 13 फरवरी व 21 फरवरी को अंबाला के शंभू बॉर्डर पर किसानों और पुलिस के बीच संघर्ष हुआ था। जिसमें कई पुलिस कर्मी और किसान घायल हो गए थे। इस मामले में किसान नेता नवदीप जलबेड़ा और उसके साथी गुरकीरत को मोहाली एयरपोर्ट से अंबाला की सीआईए टीम ने गिरफ्तार किया था। इसके विरोध में किसानों ने अंबाला लुधियाना रेलवे ट्रेक को भी कई दिन तक बाधित रखा था। बाद में किसान इस पर से उठ गए थे।

मांगें पूरी नहीं हुई तो देंगे धरना
किसान मजदूर मोर्चा से जुड़े नेता अभी तक अपनी मांगों पर अडिग हैं। किसान नेताओं का कहना है कि जब बारिश, सर्दी और भीषण गर्मी उनके इरादों को नहीं डिगा सकी तो कोई उनके संघर्ष को क्या कम करेगा। सरकार केंद्र में किसी की भी बने, किसानों की ताकत उन्हें समझनी होगी और उनकी मांगों पर जब तक विचार नहीं होता तब तक वह बैठे रहेंगे।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें