संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। पराली अब प्रदूषण का कारण नहीं बनेगी, किसान अब पराली प्रबंधन के नए-नए तरीके खोजने लगे हैं। इसी कड़ी में गांव चुड़ियाला के किसान तेजिंद्र सिंह ने पराली से खाद बनाने का तरीका निकाल लिया है। जो धान की कटाई के बाद आलू की फसल लगाते हैं, जिसे लगाने में उनको बहुत अधिक खाद की आवश्यकता होती थी। लेकिन अब इस खाद की खपत को कम करने और पराली निपटान के लिए उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र तेपला के सहयोग से यह प्रयोग किया है।
किसान तेजिंद्र सिंह ने धान की पराली को आग लगाकर नष्ट करने के स्थान पर रोटावेटर की मदद से खेतों में ही दबा दिया है। सारे के सारे खेत की पराली पर रोटावेटर चलाने के बाद खेतों में पानी भर दिया। करीब 10 से 12 दिन में खेतों में पानी भरा होने के कारण पराली पूरी तरह से गल जाएगी। जब किसान इसके बाद आलू लगाएंगे तो उन्हें अतिरिक्त खाद का प्रयोग नहीं करना पड़ेगा। इस दौरान केवल आलू ही नहीं सरसों, गाजर, मूली, शलगम, पालक, मटर, गोभी, चारा व अन्य फसलें रोपित की जा सकती हैं।
यह भी हैं योजनाएं
पराली प्रबंधन के नोडल अधिकारी डॉ. राजिंद्र सिंह ने बताया कि किसान स्ट्रॉ बेलर द्वारा पराली की गांठ, बेल बनाकर या बनवाकर उसका निष्पादन किसी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम व अन्य औद्योगिक इकाइयों में कर सकेंगे। इसके लिए 1 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से किसानों को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह राशि 50 क्विंटल एवं 20 क्विंटल प्रति एकड़ पराली उत्पादन को मानते हुए दी जाएगी। इससे न केवल पराली का समाधान होगा, बल्कि प्रदूषण भी कम होगा।