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Ambala News: जांच अभियान में मिले आठ थैलेसीमिया के मरीज

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अंशु शर्मा
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अंबाला। एनीमिया मुक्त के लिए जिलाभर में चले स्वास्थ्य विभाग के 100 दिन के अभियान कारगर साबित होता दिख रहा है। तीन लाख लोगों की एनीमिया जांच में लिए गए नमूनों की गहनता से जांच की तो थैलेसीमिया के आठ मरीज सामने आए। इन मरीजों को अपनी इस बीमारी के बारे में भनक तक नहीं थी।
ये थैलेसीमिया की माइनर श्रेणी में आते हैं। इसमें मरीजों का खून 10 ग्राम तक रहता है लेकिन यह परिवार में फैलाव का काम करता है। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग ने कुल 40 नमूनों में संशय होने पर पंचकूला लैब में भेजे थे, उनमें से यह आठ मरीज सामने आए है। अब डॉक्टरों की टीम इन मरीजों व परिवार के लोगों की भी स्क्रीनिंग कर काउंसलिंग करेगी। साथ ही इन मरीजों का उपचार शुरू कर दिया है।
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थैलेसीमिया के प्रकार

माइनर - इस तरह के मरीज में खून भी सामान्य होता है और मरीज को पता नहीं चलता। जबकि यह फैलाव का काम करता है।
इंटरमीडिएट - इस मरीज को कभी इंफेक्शन या कोई बीमारी होती है तो खून की तेजी से कमी होती है।

मेजर - यह सबसे गंभीर है। बचपन में सवा या एक साल में मरीज में खून नहीं बन पाता है। इसका शुरुआती चरण में ही पता चल जाता है। ऐसे में मरीज का समय-समय पर खून बदलना पड़ता है।


अंबाला में अभी 25 थैलेसीमिया के मरीजों का चल रहा उपचार

छावनी नागरिक अस्पताल में थैलेसीमिया के 25 एक्टिव मरीज है। जिनका समय-समय खून बदला जा रहा है। इस अभियान के तहत छह माह से लेकर 59 माह के 12818 बच्चे, पांच वर्ष से नो वर्ष के 12179, 10 से 19 वर्ष के 23150, 20 से 49 वर्ष के 30021, 3818 गर्भवतियों, 2466 दूध पिलाने वाली माताएं और 51712 अन्य लोगों की एनिमिया जांच हुई है।
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वर्जन
एनीमिया मुक्त अभियान के तहत डोर टू डोर जाकर स्वास्थ्य वर्कर की ओर से जांच की गई थी। इस बीच 40 नमूनों को पंचकूला लैब में भेजने पर आठ थैलेसीमिया के मरीज सामने आए है। इन मरीजों का उपचार शुरू कर दिया गया है। परिवार की भी हिस्ट्री का पता लगाया जाएगा
डॉ. नीतू, पैथोलॉजिस्ट, छावनी नागरिक अस्पताल
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