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Haryana: अंबाला में चुनावी अखाड़े से महिला उम्मीदवारों की दूरी, आखिरी बार 2009 में चरणजीत कौर थीं मैदान में

Sat, 21 Sep 2024 10:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो वैभव शर्मा, अंबाला (हरियाणा)

सार

अंबाला सिटी सीट पर आखिरी बार वर्ष 2009 में चरणजीत कौर चुनाव लड़ीं थी। इसके बाद कोई महिला चुनाव लड़ने को आगे नहीं आईं। जिले के दूसरे विधानसभा क्षेत्रों की बात करें तो नारायणगढ़ में कुल सात उम्मीदवारों में से तीन महिला उम्मीदवार हैं।
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हरियाणा विधानसभा चुनाव - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अंबाला जिले में अंबाला शहर सीट कभी महिला उम्मीदवारों के लिए चुनावी अखाड़ा हुआ करती थी मगर अब इस यहां से महिला उम्मीदवार गायब हैं। पिछले दो विधानसभा चुनावों से तो एक भी महिला उम्मीदवार चुनावी मैदान में नहीं उतरी थी मगर इस बार भी कोई महिला उम्मीदवार मैदान में नहीं है।

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ऐसा नहीं है कि महिलाओं ने इस सीट पर नामांकन नहीं किए बल्कि उन्होंने मुख्य प्रत्याशियों के कवरिंग उम्मीदवार के तौर पर नामांकन किया था। इससे छंटनी के समय सभी फार्म रद्द कर दिए है। ऐसी स्थिति तब है जब यहां से तीन बार महिलाएं ही विधायक चुनी गईं हैं। वर्ष 1967 से वर्तमान तक अंबाला सिटी में 13 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इसमें वर्ष 1968 और 1972 में दो बार लेखवती जैन शहर से विधायक बनी थीं। इसके बाद वर्ष 2000 में भाजपा की टिकट पर वीना छिब्बर विधायक चुनी गईं।

शहर सीट पर आखिरी बार वर्ष 2009 में चरणजीत कौर चुनाव लड़ीं थी। इसके बाद कोई महिला चुनाव लड़ने को आगे नहीं आईं। जिले के दूसरे विधानसभा क्षेत्रों की बात करें तो नारायणगढ़ में कुल सात उम्मीदवारों में से तीन महिला उम्मीदवार हैं। यहां कांग्रेस ने महिला को उतारा है। इसी प्रकार मुलाना आरक्षित विधानसभा क्षेत्र में 10 उम्मीदवारों में से दो महिला उम्मीदवार हैं। यहां भाजपा और कांग्रेस दोनों ने महिलाओं को मैदान में उतारा है। इसी प्रकार अंबाला कैंट विधानसभा क्षेत्र में भी दो महिलाएं चुनाव लड़ रहीं हैं।

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सिटी सीट से महिलाएं दे चुकी टक्कर

सिटी विधानसभा क्षेत्र के पुराने रिकॉर्ड पर गौर करें तो वर्ष 1968 में कांग्रेस से लेखवती जैन तो उनके सामने जनसंघ से फकीरचंद अग्रवाल थे। तब लेखवती ने 55 प्रतिशत से अधिक मत हासिल किए थे। फकीर चंद को 36 प्रतिशत ही मत मिले थे। इसी प्रकार वर्ष 1972 के चुनाव में भी लेखवती जैन ने कांग्रेस के टिकट पर 50 प्रतिशत मत झटके थे।

इसके बाद 1977 में भी लेखवती जैन मैदान में उतरीं थी, मगर यहां उन्हें 22 प्रतिशत ही मिले और हार का सामना करना पड़ा। तब जनता पार्टी से शिव प्रसाद को 75 प्रतिशत से अधिक मत मिले थे। जैसे जैसे समय बदला मतदाताओं की संख्या में भी इजाफा होता रहा। इसके बाद वर्ष 1996 में आजाद प्रत्याशी के रूप में निर्मला संधू मैदान में तो आई मगर उन्हें काफी कम मत मिल सके।

इसके बाद वर्ष 2000 में ऐसा सिटी की सीट पर ऐसा पहली बार हुआ जब दो महिलाएं सामने सामने आई हों। यहां पर कांग्रेस से किरन बाला तो भाजपा से वीना छिब्बर एक दूसरे को टक्कर दे रहीं थी। तब वीना छिब्बर ने 42 प्रतिशत से अधिक मत पाकर जीत दर्ज कराई थी तो किरन बाला को 34.11 प्रतिशत ही मत मिले थे।

वर्ष 2005 में चुनाव में भाजपा की टिकट पर वीना छिब्बर फिर मैदान में आईं मगर तीसरे स्थान पर ही रह सकीं। वहीं वर्ष 2009 के चुनाव में शिरोमणि अकाली दल ने सिटी सीट पर चरणजीत कौर को मैदान में उतारा। उनके सामने मैदान में पंडित विनोद शर्मा थे। तब चरणजीत कौर दूसरे स्थान पर रहीं थी उन्हें 25 प्रतिशत ही मत मिले थे। इसके बाद के चुनावों में कोई महिला उम्मीदवार नहीं आ सकी।
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महिलाओं के लिए आरक्षित भी हो सकती है सिटी सीट

एडवोकेट हेमंत कुमार बताते हैं कि भारतीय संविधान के 106 संशोधन के अनुसार लोकसभा ही नहीं बल्कि विधानसभा के चुनावों में भी महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान हो चुका है मगर अभी तक इसका अनुपालन नहीं हुआ है। हरियाणा में कुल 90 विधानसभा सीटें हैं, अगर महिलाओं को आरक्षण मिला तो 30 सीटों पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व होगा। आगामी चुनावों में अगर सरकार इस नियम का अनुपालन कराती है तो अंबाला सिटी सीट भी महिलाओं के लिए इस नियम के दायरे में आ सकती है।
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