नारायणगढ़। देश में आए दिन डिजिटल अरेस्ट के मामले सामने आ रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट करके लोगों से ठगी की जाती है। डिजिटल अरेस्ट से बचना एक मुश्किल काम है लेकिन यदि लोग थोड़े भी सजग हैं और जागरूक हैं, तो साइबर ठग उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकते। ये जानकारी डीएसपी सूरज चावला ने दी। उन्होंने हाल में ही नारायणगढ़ डीएसपी का पदभार संभाला है। उन्होंने लोगों को डिजिटल अरेस्ट के बारे में जानकारी दी और इससे बचने के उपाय बताए।
क्या है डिजिटल अरेस्ट रू डिजिटल अरेस्ट ब्लैकमेल करने का एक एडवांस तरीका है। डिजिटल अरेस्ट का सीधा मतलब ऐसा है कि कोई आपको ऑनलाइन धमकी देकर वीडियो कॉलिंग के जरिए आप पर नजर रख रहा है। डिजिटल अरेस्ट के दौरान साइबर ठग नकली पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को धमकाते हैं और अपना शिकार बनाते हैं। इस दौरान वे लोगों से वीडियो कॉल पर लगातार बने रहने के लिए कहते हैं और इसी बीच केस को खत्म करने के लिए पैसे भी ट्रांसफर करवाते रहते हैं।
डिजिटल अरेस्ट की शुरुआत एक मैसेज या फोन कॉल के साथ होती है। डिजिटल अरेस्ट करने वाले ठग लोगों को फोन करके कहते हैं कि वे पुलिस या इनकम टैक्स विभाग से बात कर रहे हैं। कहते हैं कि आपके पैन और आधार का इस्तेमाल करते हुए तमाम चीजें खरीदी गई हैं या फिर मनी लॉन्ड्रिंग की गई है। कई बार यह भी दावा किया जाता है कि वे कस्टम विभाग से बोल रहे हैं और आपके नाम से कोई पार्सल आया है ,जिसमें ड्रग्स या प्रतिबंधित चीजें हैं। इसके बाद वे वीडियो कॉल करते हैं और सामने बैठे रहने के लिए कहते हैं। इस दौरान किसी से बात करने, मैसेज करने और मिलने की इजाजत नहीं होती। इस दौरान जमानत के नाम पर लोगों से पैसे भी मांगे जाते हैं।