बराड़ा। गांव सीवन माजरा स्थित शिवमंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास आचार्य रामनारायण शास्त्री ने कथा सुनाते हुए बताया कि पांडवों के पौत्र और अभिमन्यु के पुत्र राजा परीक्षित बड़े ही धर्मात्मा राजा हुए थे। एक बार वह वन में शिकार खेलने के लिए गए, तब मार्ग में एक बैल धर्म का स्वरूप, एक पांव पर खड़ा था, पास में पृथ्वी स्वरूप गाय रो रही थी और एक विशाल काया पुरुष उस बैल के एक पांव को काटना चाहता था। तभी राजा परीक्षित की दृष्टि उन पर पड़ी। तब राजा उस विशाल काय पुरुष को मारना चाहते थे। लेकिन वह कलयुग राजा परीक्षित के चरणों में गिर पड़ा।
उसके बाद कलयुग को राजा परीक्षित ने अभय दान दिया। इसके बाद कलयुग ने राजा परीक्षित से कहा महाराज मुझे कोई ऐसा स्थान बताओ, जहां मैं कलयुग निवास कर सकूं। इसके बाद महाराज परीक्षित ने कहा कलयुग आज से तुम कलयुग। जिस स्थान पर जुआ जहां खेला जाता है और मदिरा पान और जीवों की हत्या होती है, ऐसे चार स्थानों में कलयुग तुम्हारा वास होगा। इसके बाद दोबारा से कलयुग राजा से स्थान मांगता है, तो राजा उसे कहते हैं अधर्म का सोना, जाओ कलयुग तुम्हारा सोने में वास होगा।