नगर निगम की ओर से डेयरियों को वापस कांप्लेक्स में शिफ्ट करने के लिए पशुपालकों को नोटिस दिए जा रहे हैं। लगातार मिल रहे नोटिस से परेशान होकर पशुपालकों ने विधायक, मेयर व निगम आयुक्त से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उन्होंने बताया कि जब डेयरी संचालकों को प्लॉट दिए गए थे, तब उन्हें प्लॉट नहीं मिले, क्योंकि उस समय उनका क्षेत्र ग्राम पंचायत के अधीन आता था। इसके बाद जब नगर निगम ने क्षेत्र का विस्तार किया, तब यह डेयरियां निगम में आ गई।
अब उनके पास डेयरियों को शिफ्ट करने के लिए जगह नहीं है। उन्होंने मांग की कि उन्हें अन्य पशुपालकों की तरह उचित मूल्य पर प्लॉट उपलब्ध करवाएं जाएं। ताकि वह अपने कार्य को कर सकें। पशुपालकों ने बताया कि वह पिछले 30 से 35 सालों से पशुपालन का व्यवसाय कर रहे हैं, लेकिन नोटिस देने की कार्रवाई पहली बार हो रही है। उन्हें शहर के बाहर जाने के लिए कहा जा रहा है। उनका कहना है कि जहां पर वह डेयरियां चला रहे हैं, वह क्षेत्र पहले ग्राम पंचायत में आता था।
पिछले कई साल से डेयरी चला रहे हैं। अब नगर निगम की ओर से बार-बार नोटिस देकर परेशान किया जा रहा है। इसमें हमारी क्या गलती है कि हमें बाद में निगम में डाला गया है। निगम के रवैये परेशान होकर ही यहां पर आना पड़ा।
- सतवीर।
जिस समय डेयरी कांप्लेक्स में अन्य डेयरी संचालकों को प्लाट अलॉट किए थे, उस समय हम नगर निगम में नहीं आते थे। फिर हमें भी नगर निगम में डाल दिया गया। अब हमें नोटिस देकर डेयरी शिफ्ट करने के लिए कहा जा रहा है। जो संभव नहीं है।
- श्रवण कुमार।
हमारे पास इसके अलावा और कोई स्थान नहीं है, जहां हम जा सकें। जब नगर निगम का विस्तार किया तो हमें नगर निगम क्षेत्र में जोड़ लिया। इसमें हमारी कोई गलती नहीं है, लेकिन अब हमें डेयरी खाली करने के लिए परेशान किया जा रहा है।
- जगतार सिंह।
बार-बार डेयरी शिफ्ट करने के नोटिस देना पूरी तरह से गलत है। कई दशकों से डेयरियां चला रहे हैं। अचानक से हम यहां से कहां जाएंगे। हमारी ओर से पहले भी क्षेत्र में साफ-सफाई रखी जाती है, जो आगे भी रखी जाएगी। निगम को नोटिस नहीं देने चाहिए।
- बाबू राम।
हमारी ओर से मुख्य रुप से उन्हें शिफ्ट किया जा रहा है जिन्हें प्लॉट मुहैया करवाए गए हैं। जिन्हें प्लॉट नहीं मिले हैं, उनके लिए प्लॉट उपलब्ध करवाने को लेकर जल्द ही आगामी कार्रवाई की जाएगी।
- धीरेंद्र खड़गटा, आयुक्त, नगर निगम।