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बाल बंदियों पर पुलिस के लाठीचार्ज के मामले ने पकड़ा तूल

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अंबाला सिटी। टेलीविजन को लेकर शनिवार को हुए विवाद के बाद बाल बंदियों पर लाठीचार्ज का मामला तूल पकड़ चुका है। इस मामले में चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की टीम द्वारा मांगी गई जानकारी को जेल सुपरिटेंडेंट और जिला सुरक्षा अधिकारी (डीपीओ) ने अभी तक उपलब्ध नहीं करवाया है। इसे लेकर मंगलवार को सीडब्ल्यूसी इस मामले में वुमन चाइल्ड डिपार्टमेंट (डब्ल्यूसीडी) को अपनी रिपोर्ट देगी।
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अंबाला बाल सुधार गृह में 66 बंदी हैं। शनिवार को बाल सुधार गृह में टेलीविजन को लेकर बाल बंदियों में विवाद हो गया था। इसके बाद सीडब्ल्यूसी की ओर से जांच में सामने आया था कि विवाद के दौरान पुलिस की ओर से बाल बंदियों पर लाठीचार्ज करने से 30 बाल बंदी घायल हो गए थे। इसकी सूचना पाकर रविवार को सीडब्ल्यूसी ने बाल सुधार गृह का दौरा कर बच्चों से इस बारे में बातचीत भी की थी, जहां बच्चों ने खुद को सही बताते हुए उन्हें सीसीटीवी देखने को भी कह दिया था। इसके बाद सीडब्ल्यूसी टीम ने जब सुपरिटेंडेंट से सीसीटीवी फुटेज मांगी थी तो उन्होंने यह कह कर टाल दिया था कि सीसीटीवी के पासवर्ड डीपीओ के पास हैं। इसको लेकर सोमवार को दोबारा सीडब्ल्यूसी टीम ने बाल सुधार गृह का दौरा किया और सुपरिटेंडेंट के माध्यम से डीपीओ को सीसीटीवी फुटेज दिखाने को कहा। इस पर डीपीओ ने सुपरिटेंडेंट को जवाब दिया कि सीडब्ल्यूसी टीम को कह दो कि अगर सीसीटीवी फुटेज देखनी है तो मेरे कोर्ट रोड स्थित कार्यालय आ जाओ।
डीपीओ नहीं कर रहीं सहयोग : गुरदेव
सीडब्ल्यूसी टीम सदस्य गुरदेव सिंह मंडेर ने बताया कि डीपीओ की ओर से सहयोग न किए जाने को लेकर सीडब्ल्यूसी की ओर से मंगलवार को अपनी रिपोर्ट डायरेक्टर वुमन चाइल्ड डिपार्टमेंट को दी जाएगी। वहीं सीडब्ल्यूसी टीम ने बताया कि घायल बच्चों को तीसरे दिन मेडिकल के लिए शहर नागरिक अस्पताल में भेजा तो गया, लेकिन कुछ देर बाद उन्हें वापस बाल सुधार गृह भेज दिया गया। जब इसका कारण बच्चों से पूछा तो उन्होंने बताया कि सुपरिंटेंडेंट ने बोला है कि इन बच्चों का मेडिकल ऑब्जर्वेशन होम में ही हो जाएगा, आप इन्हें वापस ले आएं। लेकिन, जब सीडब्ल्यूसी टीम ने सुपरिंटेंडेंट से इसके बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि उन्होंने गार्द में किसी भी मेंबर से बच्चों को वापस बाल सुधार गृह लाने की बात नहीं की। अपनी सफाई में उन्होंने गार्द के इंचार्ज से इस संबंध में बात की तो गार्द के इंचार्ज ने बताया कि वहां अस्पताल में सीडब्ल्यूसी टीम सदस्य न होने के कारण बच्चों को वापस बाल सुधार गृह भिजवाया। सीडब्ल्यूसी टीम ने बताया कि उन्हें अगर इस बारे में सूचना दी जाती तो सीडब्ल्यूसी टीम अस्पताल में अवश्य पहुुंचती। इसके बाद शाम को दोबारा से बच्चों को मेडिकल के लिए अस्पताल भेजा गया। सोमवार को 12 बच्चों की एमएलआर काटी गई, जिनका मेडिकल मंगलवार को होगा।
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