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सीडब्ल्यूसी के समक्ष रो पड़े अभिभावक बोले: हमारे बच्चों का स्कूल ने बर्बाद कर दिया भविष्य

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सेंट पॉल स्कूल की विभिन्न कक्षाओं में पढ़ रहे 21 विद्यार्थियों के नाम काट दिए गए हैं। इस मामले को लेकर अभिभावकों ने बुधवार को सुबह साढ़े 10 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक जमकर बवाल काटा। साथ ही चेतावनी भी दी है कि यदि स्कूल प्रबंधन ने अपने इस फैसले को वापस नहीं लिया तो वे लोग डीईओ कार्यालय में ही अपने बच्चों को छोड़ देंगे, ताकि डीईओ ही उनका भविष्य तय कर सकें।
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अपने बच्चों के भविष्य को बर्बाद होते देख अभिभावक पहले जिला शिक्षा अधिकारी और फिर जिला बाल कल्याण समिति के पास पहुंचे। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) टीम ने बच्चों से जुड़ा मामला होने के कारण तुरंत स्कूल प्रबंधन को तलब कर लिया। करीब साढ़े 11 बजे स्कूल की ओर से प्रिंसिपल रुचि मानिक और मैनेजर रवि पहुंचे। यहां करीब ढाई घंटा अभिभावक और स्कूल प्रबंधकों में तीखी नोक-झोंक हुई। अपनी बात रखते हुए इस दौरान अभिभावक बिलख-बिलख कर रो तक पड़े। वे बोले- स्कूल के इस फैसले के बाद तो हमारे बच्चों का भविष्य तक खराब हो जाएगा। अभिभावकों की पीड़ा और बच्चों के भविष्य को देखते हुए सीडब्ल्यूसी ने स्कूल प्रबंधन को सभी के नाम दोबारा से दर्ज करने के आदेश दिए। इस पर मैनेजर और स्कूल प्रिंसिपल ने स्पष्ट तौर पर इंकार करते हुए कहा कि जब तक अभिभावक पूरे साल की फीस नहीं देंगे तब तक नाम दर्ज नहीं किए जाएंगे। उधर, अभिभावकों ने शिक्षामंत्री, गृहमंत्री व डीसी से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
अभिभावकों ने डीईओ को सुनाई पीड़ा
दोपहर करीब सवा 2 बजे अभिभावक बाल कल्याण समिति से उठकर शिकायत देने के लिए डीईओ के पास पहुंच गए। इस दौरान अभिभावकों ने डीईओ को अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि हमने कभी भी स्कूल की फीस देने के लिए मना नहीं किया। हां, हमें जो फीस स्कूल द्वारा बताई जा रही थी उस पर हमें संदेह था। इसलिए हमने डेढ़ वर्ष पहले भी आपको शिकायत दी थी और इस वर्ष 20 मई को भी इस मामले से आपको अवगत करवाया गया था। लेकिन आपने स्कूल पर कोई कार्रवाई नहीं की। आपने फीस के मामले में हमें भी आज तक कोई जवाब नहीं दिया। इसी का परिणाम है कि आज हमारे बच्चों के नाम स्कूल ने काट दिए गए। इस पर डीईओ ने अभिभावकों को शांत करते हुए कहा कि मैं इस मामले को देखता हूं। मगर अभिभावक इस पर संतुष्ट नहीं हुए।
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देरशाम तक चलता रहा डीईओ कार्यालय पर धरना
गुस्साए अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में देरशाम तक धरना दिया। उन्होंने कहा कि जब तक बच्चों के नाम नहीं जुड़ते तब तक वे लोग यहां से नहीं उठेंगे। इसके बाद डीईओ ने स्कूल को नाम जोड़ने के आदेश दिए, लेकिन प्रबंधन ने कहा कि इस मामले पर वीरवार को ही कार्यालय में आकर बात करेंगे। इसके बाद ही अभिभावकों का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने शाम 7 बजे धरना स्थगित कर दिया।
मेरे दो बेटे सेंट पॉल स्कूल में पड़ते हैं, जिनका नाम स्कूल ने काट दिया है। मैंने अपने बड़े बेटे का आईसीएससी के नियमानुसार दसवीं के दाखिले की बोर्ड फीस भी जमा करवा दी थी। उसके बाद भी स्कूल ने मनमर्जी करते हुए मेरे दोनों बेटों का नाम काट दिया है। हालांकि स्कूल फीस को लेकर प्रबंधन की मनमर्जी गत डेढ़ वर्ष से जारी है। डीईओ ने आज तक कोई जवाब नहीं दिया। इसी कारण स्कूल मनमर्जी कर रहा है।
- रमेश अचिंत, अभिभावक
गत वर्ष मेरी बेटी का नंबर नवोदय स्कूल में पड़ गया था। उस समय मैंने स्कूल से बेटी का स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट देने की बात कही थी। लेकिन स्कूल ने एसएलसी नहीं दिया। अब इस माह मेरी बेटी का नाम काट दिया गया। हम बार-बार जिला शिक्षा अधिकारी से कह रहे थे कि हमें स्कूल द्वारा मांगी जा रही फीस पर संदेह है आप हमें सही फीस की जानकारी मुहैया करवाएं। लेकिन उन्होंने आज तक कोई जवाब नहीं दिया।
- वीना, अभिभावक
स्कूल तानाशाही पर उतर चुका है, नित नए फरमान जारी कर हमें व हमारे बच्चों को मानसिक तौर पर परेशान करने का काम कर रहा है। यही इसी माह 01 जुलाई को भी हुआ, जब स्कूल ने हमारे बच्चों के नाम काट दिए। हालांकि गत वर्ष स्कूल ने जो हमसे फीस वसूली करने की कोशिश की थी, उसका केस अभी अदालत में विचाराधीन है। इस बार तो स्कूल ने हद ही कर दी। हमने बच्चों की किताबों पर भी 10 से 12 हजार रुपये खर्च कर रखे हैं अब स्कूल ने बच्चों का नाम ही काट दिया है।
- कुसुम, अभिभावक
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राज्य में एक स्कूल अपनी मनमर्जी कर रहा है। नाजायज तरीके से फीस के नाम पर वसूली कर रहा है। मगर शिक्षा मंत्री से लेकर अंबाला से जुड़े गृहमंत्री सब चुप हैं। हमारे बच्चों के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़ हो रहा है। ऊपर से जिला शिक्षा अधिकारी भी हमारी मदद नहीं कर पा रहे हैं। यह कैसा प्रशासन है। डीसी साहब को भी इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए।
- अरुण, अभिभावक
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मेरा बच्चा सेंट पॉल स्कूल मेें सातवीं कक्षा में पड़ता है, जिसका नाम स्कूल ने काट दिया है। स्कूल की ओर से फीस को लेकर नोटिस भेजे जा रहे हैं। हम स्कूल को कह रहे हैं कि अभी फीस का मामला जिला शिक्षा अधिकारी के पास अटका हुआ है। आज हमारी जो भी स्थिति बन रही है उसके पीछे सीधे तौर पर जिला शिक्षा अधिकारी की उदासीनता नजर आ रही है।
- मनीष, अभिभावक
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स्कूल बच्चों से शिक्षा का अधिकार छीन रहा है, अधिकारी असमर्थ महसूस कर रहे हैं और हमारी मदद तक नहीं कर पा रहे हैं। हम गत तीन दिनों से जिला शिक्षा अधिकारी का एक ही जवाब सुनते आ रहे हैं कि देखते हैं क्या करना है। अगर हमारे बच्चों का नाम स्कूल में फिर से दर्ज नहीं करवाया जाता तो हम अपने बच्चों को जिला शिक्षा अधिकारी के पास ही छोड़ देंगे।
- परवीन, अभिभावक
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एक तो पहले ही लॉकडाउन व कोरोना ने कारोबार की कमर तोड़ रखी है। ऊपर से स्कूल की मनमर्जी के चलते बच्चों का भविष्य व एक साल बर्बाद होने जा रहा है। ऐसे में आम आदमी कोर्ट की शरण में जाए तो स्कूल बदले की भावना से काम करेगा। स्थानीय प्रशासन भी हमारी कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। फिर तो हमारे पास एक ही रास्ता बचता है कि अपने बच्चों को शिक्षा विभाग के कार्यालय में ही बिठा दें।
- रमिंद्र सिंह, अभिभावक
अभिभावक द्वारा लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं। विद्यार्थियों की फीस का जवाब हमें जहां देना था वहां दे दिया है। अब इस साल की स्कूल फीस का मामला है। हमने स्कूल को निर्देश दिए हैं कि तत्काल बच्चों के नाम फिर से दर्ज करें। रही फीस की बात इसके लिए दोनों पक्षों को वीरवार सुबह 11 बजे कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है।
- सुरेश कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी अंबाला।
हमारे पास अभिभावकों की और से एक शिकायत आई थी। जिसमें अभिभावकों ने स्कूल पर मनमर्जी करने के आरोप लगाते हुए बच्चों के नाम काटने का जिक्र किया था। आज दोनों पक्षों को सुनने के बाद फाइल उच्चाधिकारियों के पास भेज दी गई है।
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- रेखा शर्मा, रंजीता एवं खुशपाल सिंह, सदस्य सीडब्ल्यूसी
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हम स्कूल से निकाले गए बच्चों को एक ही शर्त पर वापस ले सकते हैं। अगर अभिभावक बच्चों की पूरे साल की फीस एकमुश्त देने के लिए राजी हों।
- रुचि मानिक, प्रधानाचार्य सेंट पॉल पब्लिक स्कूल, अंबाला।
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