अंबाला। कंपनी वही नगर निगम नया बदल गया तो बस डोर टू डोर कूड़ा उठाने के ठेके का रेट। एक, दो या 10 फीसद नहीं बल्कि 257 फीसद से भी अधिक वह भी चार साल के भीतर। जी हां, यह कोई कोरी कल्पना नहीं है। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का इंतजार कर रहे अंबाला शहरवासियों को अब जल्द ही यह सुविधा मिलेगी। लेकिन इसके बदले सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ने के साथ आमजन की जेब भी ढीली होनी तय है। दरअसल 2017 में नगर निगम अंबाला ने जिस ठेकेदार को डोर टू डोर कूड़ा उठाने का ठेका दिया था इस बार भी ठेका उसी ठेकेदार को उसी तर्ज पर दिया जा रहा है। बस इसके लिए प्रशासनिक अप्रूवल का इंतजार है। नगर निगम के अधिकारियों ने अपनी ओर से भी औपचारिकताएं पूरी कर फाइल को अर्बन लोकल बॉडी में भेज दिया है। बता दें कि वर्ष 2019 नवंबर माह से डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन योजना बंद पड़ी है।
तब और अब के ठेके की शर्तों में किया गया है बदलाव
वर्ष 2016-17 में ठेकेदार के लिए शर्त तय की गई थी कि वह डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन करेगा और उसे पटवी तक पहुंचाएगा। इसमें लिफ्टिंग का जिम्मा भी नगर निगम का था लेकिन ट्रैक्टर-ट्राली नगर निगम की थी। अब ट्रैक्टर-ट्राली व अन्य वाहन ठेकेदार के अपने होंगे। इसके अलावा सूखे-गीले कूड़े की छंटनी से लेकर कूड़े का निस्तारण और प्रबंधन करने की जिम्मेदारी भी ठेकेदार की होगी। बताया जा रहा है कि इन्हीं शर्तों के चलते ठेके के रेट में करीब साढ़े 3 गुणा और 257 फीसद का इजाफा किया गया है।
प्लांट लगाएगा ठेकेदार पर कैसे होगी मॉनिटरिंग
ठेके की शर्त के मुताबिक कूड़े को डिस्पोज आफ करने के लिए ठेकेदार को कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाना होगा। लेकिन अभी तक ऐसी अंबाला में कहीं कोई व्यवस्था नहीं है। पटवी में करीब 12 साल का कूड़ा पड़ा है उसी का निस्तारण आजतक नहीं हो सका। दूसरा ठेकेदार गीला- सूखा कूड़ा अलग करेगा इसकी चेकिंग कौन करेगा? इसके लिए न तो किसी कमेटी का गठन किया गया न ही अंबाला में आज तक गीला-सूखा कूड़ा अलग हो सका। नगर निगम ने इसके लिए डस्टबिन भी घरों में बंटवाए थे लेकिन यह योजना भी सिरे नहीं चढ़ पाई थी। ऐसे में 350 गुणा अधिक रेट देने के बावजूद ठेके के नियम और शर्तों का पालन कैसे होगा यह सुनिश्चित नहीं हो सका है।
इस तरह अंबाला में हुई कूड़े की चांदी
2016 799 रुपये प्रति टन
2017 75 लाख रुपये प्रति माह
2018 1 करोड़ 13 लाख रुपये प्रति माह
2019 1 करोड़ 51 लाख रुपये प्रति माह
2020 2850 रुपये प्रति टन
औसतन रोजाना निकलता था 225 टन कूड़ा
2017 में जब डोर टू डोर कूड़े का उठान होता था तो रोजाना 220-225 टन औसतन कूड़ा निकलता था। इस हिसाब से हर दिन करीब 1.80 लाख और प्रति माह करीब 50 से 55 लाख रुपये प्रति माह ठेकेदार को देने पड़ते थे हालांकि इसके बाद कूड़ा औसतन रोजाना 185 से 190 टन निकलने लगा था। ऐसे में यदि अब भी इसी औसत से कूड़ा निकला तो हर दिन करीब 5 लाख 41 हजार और प्रति माह 1.5 करोड़ से 1.65 करोड़ रुपये से अधिक कूड़े पर खर्च करने होंगे।
डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन ठेके की एडमिनिस्ट्रेटिव अप्रूवल के लिए फाइल मुख्यालय भेज दी गई है। पूजा कंसोलेशन कंपनी को ठेका 2850 रुपयेे प्रति टन के हिसाब से दिया गया हे। इसमें कूड़ा उठाने से लेकर उसके निस्तारण व प्रबंधन की सारी जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी।
-विरेंद्र सहारन, ईओ नगर निगम।