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Haryana: मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित बच्चे, राष्ट्रपति को पत्र भेजकर परिजन मांग रहे इच्छा मृत्यु

Fri, 07 Jul 2023 05:49 PM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला (हरियाणा)

सार

भिवानी के बाद मस्कुलर डिस्ट्रॉफी एसोसिएशन के हरियाणा प्रधान अंबाला कैंट निवासी दिनेश ने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर इच्छामृत्यु की मांग जताई है। उनका कहना है कि बच्चों को उपचार के लिए सरकार कुछ नहीं कर रही थी तो जी कर भी क्या करेंगे।
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भिवानी का सुंदर सिंह, जिसने राष्ट्रपति से मांगी इच्छा मृत्यु - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जानलेवा मस्कुलर डिस्ट्रॉफी बीमारी से पीड़ित अपने बच्चों को बचाने के लिए सालों से संघर्ष कर रहे परिजन अब हिम्मत हारते हुए दिख रहे हैं। भिवानी के सुंदर सिंह द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को इच्छा मृत्यु देने के लिए पत्राचार किया गया है। इसके बाद मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पीड़ित परिवार एसोसिएशन हरियाणा के प्रधान ने भी आगे आकर यह इच्छा जताई है।

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250 बच्चे इस बीमारी से पीड़ित
अंबाला कैंट निवासी दिनेश ने कहा कि उनकी भी इच्छा है कि बच्चों को अगर उपचार नहीं मिल सकता तो जी कर भी क्या करेंगे। उनकी इच्छा है कि उपचार नहीं दे सकते तो पीड़ित बेटे सहित परिवार को इच्छा मृत्यु की अनुमति दें। आखिर वह बिना अपने बच्चों के जीवित रहकर भी क्या करेंगे। बताया कि दिल्ली में प्रदर्शन करने के बाद भी अभी तक कुछ समाधान नहीं हुआ है। बता दें कि प्रदेशभर में करीब 250 बच्चे इस बीमारी से पीड़ित है। यहां तक कि ह्यूमन राइट्स में भी यह केस चल रहा है।

सुंदर सिंह बोले कि दो बच्चे इस बीमारी से ग्रस्त, मतलबी दुनिया को कहेंगे अलविदा
भिवानी जिला के गांव फूलपुरा निवासी सुंदर सिंह ने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को लिखे पत्र में कहा कि उसके दो बच्चे करीब 10 वर्षीय हरेंद्र सिंह व 8 वर्षीय विरेंद्र सिंह मस्कुलर डिस्ट्रॉफी बीमारी से पीड़ित है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ वह कमजोर हो रहे हैं। जल्द उपचार नहीं मिला तो वह चलने-फिरने में भी लाचार हो जाएंगे और व्हील चेयर पर आ जाएंगे। हर जगह से थक चुके हैं। यूं तिल-तिल कर मरते नहीं देख सकते। इसलिए उन्होंने फैसला लिया है कि वह पूरे परिवार के साथ इस मतलबी दुनिया को अलविदा कहेंगे। इसलिए पूरे परिवार के साथ इच्छा मृत्यु की स्वीकृति दी जाए या फिर उनके बच्चों को बिना किसी देरी के इलाज मुहैया कराया जाए।

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यूएसए से आनी है दवा, सुंदर सिंह बोले कि सरकार से सहयोग से ही मिलेगी

सुंदर सिंह ने अपने पत्र में लिखा कि डॉक्टरों के मुताबिक, इस बीमारी की दवा यूएसए में है,जो की बहुत महंगी है। कहा कि यह दवा सिर्फ भारत सरकार के सहयोग से उपलब्ध हो सकती है। दवा के लिए पीड़ित बच्चों के परिजन हरियाणा और भारत सरकार को कई बार पत्र लिख इलाज की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। यहां तक की मानव अधिकार आयोग को भी अवगत करा चुके हैं। सुंदर ने बताया कि स्वर्गीय पिता रणबीर सिंह लोकतंत्र सेनानी थे, जो आपातकाल 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 के दौरान संविधान को बचाने के लिए जेल गए थे। बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही।

यह होती है बीमारी
मस्कुलर डिस्ट्रॉफी मासपेशियों के रोगों का एक ऐसा समूह है, अगर इस बीमारी का समय रहते इलाज न किया जाए तो ज्यादातर बच्चों की मौत 11 से 21 वर्ष के मध्य हो जाती है। चूंकि यह मांसपेशियों का रोग है। इसलिए यह सबसे पहले कूल्हे के आसपास की मांसपेशियों और पैर की पिंडलियों को कमजोर करता है, लेकिन उम्र बढ़ते ही यह कमर और बाजू की मांसपेशियों को भी प्रभावित करना शुरू कर देता है, लेकिन लगभग नौ वर्ष की उम्र के बाद से यह फेफड़े को और हृदय की मांसपेशियों को भी कमजोर करना शुरू कर देता है।

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के लक्षण

  • सीढ़ियां चढ़ने में मुश्किल होती है
  • पैर की पिंडलिया मोटी हो जाती हैं
  • पैरों की मांसपेशियों का फूल जाना
  • शुरू में बच्चा तेज चलने पर गिर जाता है
  • बच्चा थोड़ा चलने या दौड़ने पर थक जाता है
  • उठने में घुटने या हाथ का सहारा लेना पड़ता है
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दिनेश, प्रधान, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पीड़ित परिवार एसोसिएशन हरियाणा

परिजनों के पास कोई चारा नहीं बचा है। बच्चों को सामने मरते देखने से तो अच्छा है कि साथ ही मर जाए। प्रदेशभर के पीड़ित बच्चों के परिजनों ने भी सोशल मीडिया पर बने ग्रुप में भी इच्छा मृत्यु की मांग पर सहमति जताई है। परिजनों की मांग है कि सरकार बच्चों को महंगा उपचार निशुल्क उपलब्ध करवाएं। मरीज को अन्य सुविधाएं भी मुहैय्या करवाएं। 
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