सुंदर सिंह ने अपने पत्र में लिखा कि डॉक्टरों के मुताबिक, इस बीमारी की दवा यूएसए में है,जो की बहुत महंगी है। कहा कि यह दवा सिर्फ भारत सरकार के सहयोग से उपलब्ध हो सकती है। दवा के लिए पीड़ित बच्चों के परिजन हरियाणा और भारत सरकार को कई बार पत्र लिख इलाज की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। यहां तक की मानव अधिकार आयोग को भी अवगत करा चुके हैं। सुंदर ने बताया कि स्वर्गीय पिता रणबीर सिंह लोकतंत्र सेनानी थे, जो आपातकाल 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 के दौरान संविधान को बचाने के लिए जेल गए थे। बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही।
यह होती है बीमारी
मस्कुलर डिस्ट्रॉफी मासपेशियों के रोगों का एक ऐसा समूह है, अगर इस बीमारी का समय रहते इलाज न किया जाए तो ज्यादातर बच्चों की मौत 11 से 21 वर्ष के मध्य हो जाती है। चूंकि यह मांसपेशियों का रोग है। इसलिए यह सबसे पहले कूल्हे के आसपास की मांसपेशियों और पैर की पिंडलियों को कमजोर करता है, लेकिन उम्र बढ़ते ही यह कमर और बाजू की मांसपेशियों को भी प्रभावित करना शुरू कर देता है, लेकिन लगभग नौ वर्ष की उम्र के बाद से यह फेफड़े को और हृदय की मांसपेशियों को भी कमजोर करना शुरू कर देता है।
परिजनों के पास कोई चारा नहीं बचा है। बच्चों को सामने मरते देखने से तो अच्छा है कि साथ ही मर जाए। प्रदेशभर के पीड़ित बच्चों के परिजनों ने भी सोशल मीडिया पर बने ग्रुप में भी इच्छा मृत्यु की मांग पर सहमति जताई है। परिजनों की मांग है कि सरकार बच्चों को महंगा उपचार निशुल्क उपलब्ध करवाएं। मरीज को अन्य सुविधाएं भी मुहैय्या करवाएं।