अंबाला सिटी। अस्थमा बीमारी दिन पर दिन घातक होती जा रही है। न केवल बुजुर्ग बल्कि छोटे-छोटे बच्चे भी इस बीमार से अछूते नहीं हैं। बदलते मौसम, फसल कटाई और दिवाली के आसपास के मरीजों की संख्या एकाएक बढ़ जाती है।
इन दिनों इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों पर भी पढ़ रहा है। कारण यह है कि प्रदूषण का स्तर दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में बच्चों की सांस नली छोटी होने के उन्हें सबसे ज्यादा दिक्कत आती है और सांस नहीं ले पाने के कारण वह अस्थमा जैसी बीमारी का शिकार हो रहे हैं। अक्सर देखा जाता है कि बच्चों के लिए लोग मुंह ढककर भेजने की लापरवाही बरतते हैं। परिजन रूमाल या मास्क लगाते भी हैं तो बच्चे इन्हें उतार देते हैं। यहीं कारण है कि यह बीमारी लगातार बढ़ रही है।
बचाव के लिए बरतनी होगी सावधानी
यहीं नहीं अगर इस बीमारी के लिए ज्यादा गौर न किया जाए तो यह जानलेवा भी साबित हो सकती है। वहीं, स्वास्थ्य अधिकारियों की मानें तो ऐसे में घर से बाहर निकलते समय मास्क का इस्तेमाल करें। इसी स्थिति से बचने के लिए डॉक्टरों की ओर से इनहेलर का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। इससे कि कुछ माइक्रो ग्राम दवा से ही सांस से संबंधित बीमारी उस समय के लिए ठीक हो सके। यह बीमारी चाहे अनुवांशिक है। परंतु अन्य लोगों में भी यह बीमारी बहुत अधिक देखी जा रही है। इसका कारण प्रदूषण के साथ-साथ बदलती जीवन शैली, खान-पान की बदलती आदतें और अधिक धूल मिट्टी वाले क्षेत्रों में काम करना भी इसकी वजह है। इसमें भी सुधार की आवश्यकता है। डॉक्टरों के अनुसार कभी कभार तो यह बीमारी कई-कई महीनों तक पूरी तरह ठीक रहती है, जबकि कई बार एकाएक ही स्थिति खराब हो जाती है। इससे बचाव की जरूरत है।
फसल कटाई और दिवाली पर बढ़ती है परेशानी
फसल कटाई से हवा में उड़ती धूल और दिवाली के आसपास प्रदूषण की मात्रा बहुत अधिक बढ़ जाने के कारण मरीजों की संख्या में एकाएक वृद्धि होती है। डाॅक्टरों की मानें तो इन दिनों में न केवल सरकारी बल्कि प्राइवेट डॉक्टर के पास भी 20 प्रतिशत तक मरीजों में वृद्धि हो होती है। क्योंकि इस समय हवा में धूल के कणों की मात्रा अन्य दिनों के मुकाबले बहुत अधिक होती है जिस कारण सांस लेने में लोगों को दिक्कत आती है।
दिक्कत हो तो करें डॉक्टर से संपर्क
टीबी अस्पताल के एसएमओ डॉ. हितेश का कहना है की सांस की बीमारी से तुरंत निपटने के लिए मरीजों को इनहेलर लेने का सुझाव दिया जाता है। जबकि बहुत से लोग इनहेलर का प्रयोग करने से बचते हैं, मरीजों को ऐसा लगता है कि इनहेलर की आदत लग जाती है। परंतु इनहेलर के माध्यम से बहुत कम दवाई में बहुत तेजी के साथ सांस के मरीजों को राहत मिलती है। इसके अलावा अगर मरीज डॉक्टर के सुझाव पर दवा लें तो उसकी यह समस्या ठीक भी हो जाती है।