तीन साल पहले सामूहिक दुष्कर्म मामले की जांच करने के लिए पंचकूला से नारायणगढ़ क्षेत्र के गांव लौटों में आए पुलिस मुलाजिमों पर मारपीट व पैसे हड़पने के आरोप में केस दर्ज किया गया है। मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन की ओर से कराई गई जांच में दोषी पाए जाने के बाद मामले में दो इंस्पेक्टर सहित आठ पुलिसकर्मियों को नामजद किया गया है। इसमें इंस्पेक्टर नवीन सहारण व कर्मवीर सिंह, एएसआई प्रदीप कुमार पंचकूला, ओम प्रकाश, हेड कांस्टेबल रविंद्र पाल, कंवरपाल , प्रविंदर, ईएचसी लखमीरा पंचकूला शामिल हैं।
घटनाक्रम के अनुसार पंचकूला पुलिस 2018 में एक महिला के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म की जांच कर रही थी। मामले में 40 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इसी संबंध में 21 माह बाद पुलिस ने नारायणगढ़ निवासी एक आरोपी विष्णु को गिरफ्तार किया था। उस समय पुलिस टीम ने जाते समय गांव लौटों निवासी शिव कुमार और कपिल ठाकुर पर सरकारी ड्यूटी में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज करवाया था। टीम का कहना था कि शिव और कपिल ने आरोपित विष्णु को छुड़वाने का प्रयास किया था।
इसके बाद में कपिल ने भी पुलिसकर्मियों पर मारपीट करने और जबरन कार ले जाने का आरोप लगाया था। साथ ही कार से 50 हजार रुपये निकाल लेने की भी शिकायत दी थी। उस समय कपिल की शिकायत पर पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद कपिल ने मानवाधिकार आयोग चंडीगढ़ में शिकायत दी।
साथ ही सबूत के तौर पर दो वीडियो भी सौंपी थी, जिसमें पुलिसकर्मियों की ओर से मारपीट के प्रमाण थे। जांच के बाद दोषी पाए जाने पर मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन के आदेश पर वीरवार की देर रात आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
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पुलिसकर्मियों के खिलाफ यह थी शिकायत
मानवाधिकार आयोग में दी गई शिकायत में गांव लौटों निवासी कपिल ठाकुर ने कहा था कि वह दूध की डेयरी चलाता है। एक मई 2020 को 9 से 10 पुलिस कर्मचारी प्राइवेट गाड़ी में आए और उनके चाचा विष्णु को पकड़ लिया। कपिल का आरोप है कि चाचा-भतीजा दोनों की पिटाई की और दादा कुलदीप सिंह को भी धक्का देकर नीचे गिरा दिया। बाद में पुलिसकर्मी नारायणगढ़ थाने ले गए और यहां पर उनके खिलाफ ही मुकदमा दर्ज करवा दिया। इस दौरान पुलिसकर्मी उनकी कार भी ले गए थे और उन्होंने दो दिन बाद कार वापस तो कर दी, लेकिन उसमें रखे 50 हजार रुपये निकाल लिए।