कपाल मोचन मेला का शुक्रवार को पहला दिन रहा। रोडवेज की करीब 21 बसें अंबाला छावनी के अंतरराज्यीय बस स्टैंड से कपाल मोचन मेले के लिए शाम तक रवाना हुई। इन बसों में करीब 500 श्रद्धालु रोडवेज बसों में सवार होकर मेले में गए। यात्रियों को किसी तरह की दिक्कत न आए, जिसके लिए रोडवेज ने पांच इंस्पेक्टर की ड्यूटी लगाई गई है।
रोडवेज डिपो अंबाला ने कपालमोचन मेले की भीड़ देखते हुए स्पेशल 40 बसें लगाई गई है यह बसें कैंट बस स्टैंड से मेला और वाया जगाधरी रोड से होते हुए अंबाला छावनी में आएंगी। रोडवेज ने रूट को भी अलग कर दिया है ताकि एक ही रूट पर किसी तरह की भीड़ से जाम की स्थिति पैदा न हो। शुक्रवार का हाल यह था कि सुबह 7 बजे पंजाब से आने वाले पैसेंजर और उसके बाद एक्सप्रेस समेत अन्य ट्रेनों के आने से भीड़ काफी बढ़ गई। रोडवेज बस स्टैंड पर एक साथ काफी काफी श्रद्धालु पहुंचे तो आनन-फानन में करीब चार बसों को लगाया गया। इसके बाद मेले की भीड़ शाम तक बस स्टैंड पर जारी रही।
प्राइवेट वाहनों पर रोक
बस स्टैंड पर बसों के आवागमन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए प्राईवेट वाहनों पर रोक लगा दी गई। परिसर में स्पेशल लाल कुर्ती पुलिस की ड्यूटी रहेगी। सुबह से लेकर शाम तक लाल कुर्ती पुलिस की सुरक्षा के चलते वाहनों को वापस लौटाया गया। इस दौरान कुछ वाहन चालकों के साथ पुलिस की बस स्टैंड परिसर के अंदर जाने को लेकर बहस भी हुई।
अपने वाहनों से भी पहुंच रहे हैं श्रद्धालु
पंजाब से मेले में स्नान के लिए जाने वाले श्रद्धालु अपने वाहनों से भी मेले में पहुंचने शुरू हो गए हैं। श्रद्धालु छोटे हाथी से लेकर बड़े ट्रकों और अन्य कर्मशियल वाहनों के जरिए पहुंचना शुरू हो गए हैं। स्नान के बाद श्रद्धालु दो दिन के बाद वापस लौटेंगे। इसके अलावा दो दिन तक वहीं पर रहेंगे। इसीलिए रोडवेज इन श्रद्धालुओं को न सिर्फ सुरक्षित मेले तक लेकर जाने में जुटा है बल्कि हर साल कमाई के मामले में पीछे नहीं रहता।
शौचालय की नहीं है व्यवस्था
हरदेव सिंह ने बताया कि वह बीते 30 साल से मेले में आ रहा है। जैसे-जैसे श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है और उसके मुताबिक सुविधाएं नहीं बढ़ाई गई। इसीलिए श्रद्धालुओं को बड़ी ही दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
लंगर लगाने के लिए पैसे देने पड़ते हैं
गांव गंगरोली के रहने वाले श्रद्धालु जरनैल सिंह नंबरदार ने बताया कि पंजाब से श्रद्धालुओं के लिए कुछ दानी सज्जन लंगर लगाने के लिए जब कपालमोचन जाते हैं उन्हें जगह तक नहीं दी जाती। उनसे लंगर लगाने के लिए नाम से भी पैसा वसूला जाता है।
शौचालय की व्यवस्था नहीं
सरवंत सिंह ने बताया कि मेले के लिए तकरीबन सभी व्यवस्था ठीक है लेकिन शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है इसीलिए लोगों को बड़ी ही दिक्कत का सामना करना पड़ता है। इसीलिए प्रशासन को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।
परिवहन सेवा अच्छी होती है
मघ्घर सिंह ने बताया कि वह मेले में करीब 25-30 साल से आ रहे हैं। अंबाला और यमुनानगर रेलवे स्टेशन के नजदीक कपालमोचन मेले जाने के लिए रोडवेज हमेशा से सर्विस देता आ रहा है। इसीलिए आने-जाने में किसी तरह की दिक्कत नहीं होती है।
दोस्तों संग 30 साल से आ रहा हूं
श्रद्धालु जगदेव सिंह ने बताया कि वह अपने गांव के दोस्तों के साथ 30 साल से मेले में आ रहा है। मेले में श्रद्धा की डूबकी लगाने से शांति मिलती है। इसीलिए वह हर साल अपने दोस्तों के साथ संग यहां पर आते हैं। मेले में श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था की तरफ ध्यान देने की जरूरत है।
मेले को लेकर बस स्टैंड पर र्प्याप्त बसें हैं जो मेले का चक्कर लगा रही है पांच इंस्पेक्टर की ड्यूटी है। किसी तरह की कोई दिक्कत श्रद्धालुओं को नहीं आने दी जाएगी। दो दिन तक रश काफी रहेगा। इसीलिए बस स्टैंड पर स्टाफ की छुट्टी भी कैंसिल की गई है।
- राम रत्न शर्मा, संस्थान प्रबंधक, अंतर राज्यीय बस स्टैंड अंबाला छावनी।