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Ambala News: नारायणगढ़ के जिला बनने से पूर्व सैनिकों को घर के समीप ही मिलेगी कैंटीन की सुविधा

Wed, 15 Oct 2025 11:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
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संवाद न्यूज एजेंसी
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नारायणढ़। डेढ़ दशक से नारायणगढ़ को जिला बनाने की मांग चली आ रही है। इस क्षेत्र का इतिहास सेना में गौरवपूर्ण रहा है। क्षेत्र से हजारों की संख्या में सेना में जवान हैं और पूर्व सैनिक भी यहां रहते हैं। ऐसे में नारायणगढ़ जिला बना इन पूर्व सैनिकों व सैनिकों के परिवाराें को कैंटीन का लाभ लेने के बाद अंबाला के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। पूर्व में जिला अंबाला में नारायणगढ़, जगाधरी, रोपड़ तहसीलें थीं, जबकि कालका उप तहसील थी। नारायणगढ़ को शेष छोड़कर तमाम तहसीलों के लिए जिले बन गए हैं। जगाधरी के लिए यमुनानगर, रोपड़ स्वयं जिला व कालका के लिए पंचकूला को जिला बनाकर जनहित में कार्य किया गया मगर नारायणगढ़ अब तक अनदेखी का शिकार बना हुआ है।



कमिश्नरी लागू कर जिला की तरफ बढ़ा था कदम

नारायणगढ़ बचाओ संघर्ष समिति से सदीक चौहान ने बताया कि नारायणगढ़ को जिला बनने योग्य मानते हुए सरकार ने यहां कमिश्नरी लागू की थी। डीसीपी यहां बैठते थे। जिनके अधीन नारायणगढ़ के अलावा मुलाना, बराड़ा, रायपुररानी क्षेत्र रह चुका है, लेकिन अप्रिय कारणों के चलते कमिश्नरी तोड़ दी गई। नारायणगढ़ उपमण्डल का इलाका शिवालिक क्षेत्र के अधीन है, जोकि पिछड़ा व अर्ध पहाड़ी क्षेत्र है। नारायणगढ़ के निवासियों को रोजमर्रा के जिला प्रशासनिक कार्यो के लिए 40 से 55 किलोमीटर दूर अंबाला जाना पड़ता है, जबकि सरकार नारायणगढ़ को जिला का दर्जा दे तो सरकार का प्रशासनिक दफ्तरों के निर्माण के लिए भी कोई खर्च नही होगा। क्योंकि नारायणगढ़ में पहले से ही मिनी सचिवालय है।
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नारायणगढ़ बचाओ संघर्ष समिति से सदीक चौहान ने बताया कि नारायणगढ़ को जिला बनने योग्य मानते हुए सरकार ने यहां कमिश्नरी लागू की थी। डीसीपी यहां बैठते थे। जिनके अधीन नारायणगढ़ के अलावा मुलाना, बराड़ा, रायपुररानी क्षेत्र रह चुका है। लेकिन अप्रिय कारणों के चलते कमिश्नरी तोड़ दी गई। नारायणगढ़ उपमण्डल का इलाका शिवालिक क्षेत्र के अधीन है, जोकि पिछड़ा व अर्ध पहाड़ी क्षेत्र है। नारायणगढ़ के निवासियों को रोजमर्रा के जिला प्रशासनिक कार्यों के लिए 40 से 55 किलोमीटर दूर अंबाला जाना पड़ता है, जबकि सरकार नारायणगढ़ को जिला का दर्जा दे तो सरकार का प्रशासनिक दफ्तरों के निर्माण के लिए भी कोई खर्च नही होगा। क्योंकि नारायणगढ़ में पहले से ही मिनी सचिवालय है।
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