फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नेहा के लिए मसीहा बनी सेना, मासूम को मिली नई जिंदगी

विज्ञापन
चार साल की मासूम नेहा भगत जिसका सेना ने करवाया इलाज। - फोटो : ?????
विज्ञापन
मोहित धुपड़
विज्ञापन

करनाल। सरहद की रक्षा संग देशवासियों की सेवा में भी भारतीय सेना सदैव अग्रणी रहती है। इसी का एक उदाहरण सेना ने चार साल की मासूम नेहा के लिए मसीहा बनकर दिया है। जिंदगी और मौत से जूझ रही इस चार साल की बच्ची का इलाज करवाकर सेना ने उसे नया जीवन प्रदान करने में अहम रोल अदा किया है। इतना ही नहीं सेना ने मासूम के परिजनों से बच्ची की तालीम और सेहत की देखभाल जारी रखने का भी वादा किया है।
जम्मू एवं कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के एक दूरस्थ गांव में रहने वाली करीब चार साल की मासूम नेहा भगत पैदा होते ही कंजेनाइटल डिसऑर्डर से ग्रस्त थी। जिसके चलते उसकी एक सर्जरी तो पैदा होते ही करनी पड़ी थी। उसके बाद चिकित्सकों ने बच्ची को बेहतर इलाज के लिए चंडीगढ़ रेफर कर दिया, लेकिन परिजनों की माली हालात बेहतर न होने के कारण वे बच्ची का चंडीगढ़ जाकर लंबा चलने वाला इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ थे। नतीजतन बच्ची का इलाज टलता ही चला गया और उसके जीवन पर संकट बरकरार रहा।
विज्ञापन

इसके बाद परिजनों ने भारतीय सेना द्वारा स्थानीय लोगों के लिए घाटी में लगाए जाने वाले चिकित्सा शिविरों में बच्ची को दिखाना शुरू किया तो सेना इस बच्ची के इलाज के लिए आगे आई। इसका जिम्मा सेना की 17 आआर ने उठाया। बच्ची की बीमारी के बारे में पूरी जानकारी हासिल करने के बाद इस यूनिट के जवान बच्ची को परिजनों संग लेकर पीजीआई चंडीगढ़ पहुंचे, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने नेहा का इलाज शुरू किया। इस इलाज के दौरान सितंबर 2021 में जब बच्ची तीन साल की पूरी हुई तो पीजीआई में ही उसका पहला ऑपरेशन करवाया गया। बच्ची लगातार सेना की निगरानी में रही और पीजीआई में उसका नियमित चेकअप भी चलता रहा। अब पिछले दिनों मई में सेना ने पीजीआई से बच्ची का दूसरा सफल ऑपरेशन भी करवा दिया है।
विज्ञापन

सेना के एक अफसर ने बताया कि बच्ची की बीमारी के संदर्भ में पहली सर्जरी पिछले साल सितंबर में हो गई थी, जबकि फाइनल सर्जरी अब मई में पूरी हो गई है, इसका रिव्यू भी पूरी तरह हो चुका है। उनके अनुसार रिव्यू के बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बताया है कि बच्ची अब ठीक है और बाकी बच्चों की तरह अपना सामान्य जीवन जी सकती है। दो माह बाद बच्ची को जांच के लिए फिर पीजीआई बुलाया गया है। इसके अतिरिक्त सेना ने परिजनों से बच्ची की तालीम और उसकी सेहत की नियमित देखभाल करने की भी बात कही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें