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गेहूं की कम उपज ने बढ़ाई किसानों की परेशानी

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बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि का असर दिखाई देने लगा है। जहां अन्य सालों में गेहूं की प्रति एकड़ पर 20 क्विंटल व उससे अधिक गेहूं की उपज हो जाती थी। वह इस बार घटकर आधे से भी कम यानी केवल 7 से 8 क्विंटल ही रह गई है। इक्का दुक्का किसान ही ऐसे हैं, जिनकी 12 से 15 क्विंटल गेहूं एक एकड़ से निकल रही है। इतनी कम गेहूं निकलने के कारण किसान पूरी तरह से परेशान है।
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किसानों का कहना है लगातार बढ़ रही महंगाई के कारण फसलों पर लगने वाली लागत दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। वहीं, सरकार की ओर से जो समर्थन मूल्य दिया जा रहा है वह भी र्प्याप्त नहीं है। अब तो फसल की उपज भी काफी कम हो रही है। जिस कारण उनकी परेशानी बढ़ गई है। किसानों ने मांग की है कि इस बार किसानों को फसल के अधिक दाम दिए जाएं, इससे कि उन्हें कुछ राहत मिल सके।
पिछले सालों के मुकाबले इस बार फसल की उपज बहुत ही ज्यादा कम है यानि केवल 8 से 10 क्विंटल ही निकल रही है। बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि ने ऐसी मार मारी है कि हम किसानों की कमर टूट गई है। सरकार को चाहिए किसानों के लिए कुछ राहत पैकेज का इंतजाम करें। इससे किसानों को कुछ राहत मिल सके।
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- स्वर्ण सिंह, किसान।
पहले वर्षों में जहां 20 क्विंटल के करीब फसल आराम से निकल आती थी, परंतु इस बार तो 10 क्विंटल भी ढंग से नहीं निकल रही है। इससे हमारा बहुत अधिक नुकसान हुआ है। सरकार को चाहिए कि किसानों को कुछ राहत दे, इससे कि बढ़ती महंगाई में वह राहत की सांस ले सकें।
- अमरजीत सिंह, किसान।
हमारी फसल पहले के मुकाबले चाहे कम है, परंतु अन्य किसानों से काफी बेहतर है। हमारी एक एकड़ में करीब 15 क्विंटल गेहूूं निकल गई है, परंतु फिर भी हम किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। किसानों के राहत के लिए सरकार को इस बार समर्थन मूल्य में वृद्धि करनी चाहिए।
- जसवीर सिंह, किसान।
हम किसानों को इस बार बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि के कारण काफी नुकसान झेलना पड़ा है। एक तो वैसे ही दिन पर दिन महंगाई बढ़ती जा रही है और ऊपर से यह फसल की कम उपज ने हमारी परेशानी और अधिक बढ़ा दी है।
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- माह सिंह, किसान।
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