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Ambala News: उम्र हारी, हौसला जीता<bha>;</bha> अंबाला में दिखी साक्षरता की अनूठी तस्वीर

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अंबाला के धनाना गांव ​स्थित सीएम ईईई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय उल्लास लर्नर परीक्षा के दौ
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संवाद न्यूज एजेंसी
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अंबाला। साक्षरता केवल अक्षरों को पहचानने और शब्द लिखने का नाम नहीं, बल्कि अपने भीतर छिपे आत्मविश्वास को जगाने का नाम है। अंबाला में रविवार को आयोजित उल्लास परीक्षा के लिए 488 विद्यालयों में बनाए गए केंद्रों पर 2 हजार से अधिक शिक्षार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।
यह परीक्षा इस भावना की ऐसी अनेक जीवंत कहानियों की गवाह बनी, जिन्होंने उम्र, परिस्थितियों और शारीरिक कठिनाइयों को पीछे छोड़कर सीखने की नई मिसाल कायम की। जिला शिक्षा अधिकारी सुधीर कालड़ा के निरक्षरता मुक्त, पूर्ण साक्षर अंबाला के आह्वान और माइक्रो-लेवल प्लानिंग ने इस अभियान को जन-आंदोलन बना दिया। कहीं सर्वेयर मोटरसाइकिल पर शिक्षार्थी को केंद्र तक लाए, तो कहीं स्वयंसेवी शिक्षकों और विद्यार्थियों ने जिम्मेदारी संभाली। अंबाला में यह केवल परीक्षा नहीं, बल्कि हजारों जिंदगियों में ज्ञान और नई उम्मीद का एक नया अध्याय था।
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व्हीलचेयर पर पहुंचीं 71 वर्षीय रामवती
मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नारायणगढ़ में 71 वर्षीय रामवती व्हीलचेयर पर परीक्षा देने पहुंचीं। उम्र और शारीरिक असुविधा उनके हौसले के सामने छोटी पड़ गई। वहीं, 79 वर्षीय रामनाथ की रीढ़ की समस्या को देखते हुए उनके घर पर ही परीक्षा का विशेष आयोजन करवाया गया। इससे साबित हुआ कि शिक्षा हर चौखट तक पहुंच सकती है।

पोते ने निभाई वीटी की भूमिका
पीएम श्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दुराना में बलराम सिंह अपने यूकेजी में पढ़ने वाले पोते पविश के साथ परीक्षा देने पहुंचे। बलराम सिंह ने बताया कि पोते को पढ़ते देखकर उनके मन में इच्छा जगी और पविश ने ही उन्हें पढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
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पति-पत्नी, सास-बहू और जेल बंदियों की मिसाल
कोडवा खुर्द में 1947 में जन्मे बलवंत सिंह और उनकी पत्नी मोहन देवी ने एक साथ परीक्षा दी। 90 वर्ष से अधिक उम्र के रवैल सिंह, 82 वर्षीया महेंद्र कौर और 95 वर्षीया तेज कौर ने परीक्षा दी। बंटवारे के समय 11 वर्ष के रहे रवैल और महेंद्र ने उर्दू में हस्ताक्षर कर पुराने दिनों की यादें साझा कीं। वहीं, केंद्रीय कारागृह अंबाला में 138 पुरुष और 14 महिला बंदियों (कुल 152) ने परीक्षा देकर साबित किया कि शिक्षा का उजाला किसी सीमा में नहीं बंधता। इसके अलावा केंद्रों पर सास-बहू की जोड़ियों के साथ-साथ पति-पत्नी की 14 जोड़ियों ने एक साथ साक्षरता की ओर कदम बढ़ाया।
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अब शब्द भी मेरे हैं और अभिव्यक्ति भी मेरी
उल्लास शिक्षार्थी बलजीत सिंह ने अपने हाथों से धन्यवाद पत्र लिखकर कहा, अब शब्द भी मेरे हैं और अभिव्यक्ति भी मेरी, उल्लास ने मुझे एक नई पहचान दी।

अंबाला के धनाना गांव स्थित सीएम ईईई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय उल्लास लर्नर परीक्षा के दौ

अंबाला के धनाना गांव स्थित सीएम ईईई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय उल्लास लर्नर परीक्षा के दौ

अंबाला के धनाना गांव स्थित सीएम ईईई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय उल्लास लर्नर परीक्षा के दौ

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