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जिंदा रहेेंगी घसीटा राम की आंखें

Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
Ambala
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नग्गल (अंबाला)। गांव जनसुई के 90 वर्षीय घसीटा राम के परिजनों ने घसीटा राम की मृत्यु के उपरांत उनके नेत्रदान करके ग्रामीण क्षेत्र में एक नई पहल की है। तर्कशील सोसायटी के प्रयासों से किए गए इस समाज सेवा के कार्य में परिजनों के साथ-साथ तर्कशील सोसायटी के सक्रिय कार्यकर्ता हरबिलास और इसी सोसायटी से जुड़े घसीटा राम परिवार के युवा विकास कुमार ने विशेष भूमिका अदा की है।
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विकास कुमार ने बताया कि उनके दादा घसीटा राम ने ज्ञान के अभाव के कारण हालांकि नेत्रदान का संकल्प नहीं लिया था लेकिन सोसायटी से जुड़े होने के कारण उनकी मृत्यु के कारण उसने अपने गांव के लोगों को इस पुण्य कार्य के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से यह पहल की है।
तर्कशील सोसायटी के सक्रिय कार्यकर्ता हरबिलास भुडंगपुर, जिनके परिवार के सभी 18 सदस्यों ने देह दान का संकल्प लिया हुआ है, ने बताया कि उनकी सोसायटी अब तक अंबाला के ग्रामीण क्षेत्रों में 100 से अधिक लोगों को मरणोपरांत नेत्रदान और 35 से अधिक लोगों को देह दान करने के लिए प्रेरित कर चुकी है।
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इसी वर्ष 12 मार्च को हरबिलास के पिता कली राम का शरीर भी मरणोपरांत पीजीआई चंडीगढ़ को दान किया गया था। उन्होंने बताया कि जनसुई निवासी घसीटा राम के नेत्रदान करने के लिए भी उनके परिवार को समझाने में काफी प्रयास करने पड़े और अंत में पीजीआई चंडीगढ़ से डा. अंजलि के नेतृत्व में टीम को बुलाकर नेत्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि नेत्रदान करने वाले लोगों के फार्म माधव नेत्र बैंक अंबाला शहर के माध्यम से भरवाए जा रहे हैं जबकि शरीर दान के लिए पीजीआई चंडीगढ़ के चिकित्सकों के माध्यम से यह पंजीकरण करवाया जा रहा है।
माधव नेत्र बैंक अंबाला की डा. सुजाता ने बताया कि गर्मी के दिनों मे मृत्यु के उपरांत 6 से 8 घंटे तथा सर्दियों में 24 घंटे तक नेत्रदान किया जा सकता है। नेत्रदान और देहदान के क्षेत्र में राहत इंटरनेशनल संस्था भी जिला में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है और संस्था के चेयरमैन जेपी मेहता के प्रयासों से उल्लेखनीय संख्या में लोगों ने देहदान और नेत्रदान का संकल्प लिया है।
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