टॉय ट्रेन से अब कालका से शिमला की लगभग 96 किलोमीटर की दूरी अब 5 घंटे की जगह 4 घंटे में पूरी होगी। मंडल ने वर्ल्ड हैरिटेज सेक्शन के तीन मुख्य रेल मार्ग के मोड़ खत्म कर उन्हें सीधा कर दिया है। अब इस रेल खंड पर ट्रेन 15 की बजाय 25 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी। इससे यात्रियों के समय की बचत होगी और वे जल्द गंतव्य पर पहुंच सकेंगे। ये जानकारी मंडल रेल प्रबंधक गुरिंदर मोहन सिंह ने दी।
उन्होंने बताया कि कालका-शिमला रेल खंड यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त दुनिया में बहुत कम विरासत रेलवे में से एक है। शिमला हिमाचल प्रदेश राज्य का एक प्रसिद्ध हिल स्टेशन है। कालका-शिमला टॉय ट्रेन पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। ट्रेन के माध्यम से पर्यटकों को हरा-भरा वातावरण, पेड़-पौधे और पहाड़ों सहित कई मनोरम दृश्य देखने को मिलते हैं। इस रेल खंड पर 1903 में टॉय ट्रेन का संचालन शुरू हुआ था। कालका शिमला खंड पर 15 किमी प्रति घंटे से 25 किमी प्रति घंटा गति बढ़ाने के प्रयासों के तहत टकसाल, गुम्मन और कुमारहट्टी स्टेशनों पर तीन टर्नआउट कांटा-क्रासिंग को बदलने की आवश्यकता थी। मंडल ने महाप्रबंधक द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुसार काम पूरा करके टकसाल स्टेशन पर तीसरे टर्नआउट कांटा-क्रासिंग को बदल दिया है। सीआरएस की मंजूरी के बाद गति सीमा बढ़ाई जाएगी, इसके लिए कागजात पहले ही मुख्यालय को जमा किए जा चुके हैं। इन तीनों टर्नआउट कांटा- क्रासिंग को कठुआ में ब्रिज वर्कशॉप जालंधर के अथक प्रयासों ने समय अवधि के अंतर्गत कार्य करके उल्लेखनीय योगदान दिया है। वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक हरी मोहन ने बताया कि ट्रेनों का संचालन लगातार किया जा रहा है और पर्यटकों को भी रेलवे द्वारा लगातार सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।