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जग्गी सिटी सेंटर की बढ़ी मुश्किलें, पाल्यूशन बोर्ड ने रद किया सीटीई का आवेदन

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पॉल्यूशन बोर्ड ने रद्द किया सीटीई का आवेदन, फिर भी बन गया जग्गी शॉपिंग मॉल
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। जीटी रोड पर स्थित जग्गी सिटी सेंटर शॉपिंग मॉल की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। पॉल्यूशन नियंत्रण बोर्ड ने मे. जग्गी कंस्ट्रक्शन प्रा. लि., सेना नगर, मॉडल टाउन क्रॉसिंग, अंबाला शहर के नाम से सीटीई का आवेदन रद कर दिया है। यह खुलासा आरटीआई में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से दिए गए जवाब में हुआ है। इस कारण जग्गी सिटी सेंटर पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
बता दें कि जग्गी सिटी सेंटर की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले दिनों अवैध निर्माण को लेकर नगर निगम ने कार्रवाई की थी। इसके बाद आरटीआई (सूचना का अधिकार) में पॉल्यूशन नियंत्रण बोर्ड द्वारा दी गई जानकारी में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता बजिंद्र कुमार आर्य ने 10 मई को अंबाला जीटी रोड पर शताब्दी द्वार के पास स्थित जग्गी सिटी सेंटर को लेकर आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी थी। उन्होंने इस जगह को निर्मित डिजाइन, भवन निर्माण के लिए किस-किस विभाग ने अनुमति सर्टिफिकेट या जारी किए हैं, इस संबंध में सूचना अधिकारी से जानकारी मांगी थी। हालांकि अभी तक सिर्फ हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से ही जानकारी दी गई है। इसमें बताया गया है कि मे. जग्गी कंस्ट्रक्शन प्रा. लि., सेना नगर, मॉडल टाउन क्रॉसिंग, अंबाला शहर की तरफ से 22 नवंबर 2017 को सीटीई के लिए आवेदन किया गया, जिसे एक माह बाद यानी 22 दिसंबर 2017 में रद कर दिया गया था।
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अधिकारियों पर भी उठ रहे सवाल
बता दें कि बिना सीटीई सर्टिफिकेट के कोई भी फैक्ट्री, होटल, शॉपिंग मॉल आदि का निर्माण नहीं हो सकता है। इसके बावजूद जग्गी सिटी सेंटर का निर्माण अधिकारियों को भी कठघरे में खड़ा कर रहा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि जग्गी सिटी सेंटर का निर्माण तीन-चार साल पहले ही शुरू हो गया था, लेकिन सर्टिफिकेट लेने के लिए प्रा. लि. की तरफ से नवंबर 2017 में आवेदन क्यों किया गया।
क्या है सीटीई
जल अधिनियम 1974 और वायु अधिनियम 1981 के अनुसार, साइट पर निर्माण गतिविधियों के शुरू होने से पहले राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सीटीई (कंसेंट टू स्टेब्लिश) प्राप्त करना अनिवार्य है। सीटीई प्राप्त करने की प्रक्रिया में आवश्यक दस्तावेज और जांच शुल्क के साथ संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्धारित प्रारूप में आवेदन करना शामिल है। इसके बाद साइट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित अनिवार्य आवश्यकता को पूरा करने के लिए प्रस्तावित पर्यावरणीय प्रबंधन प्रणाली के साइट का निरीक्षण और मूल्यांकन किया जाता है।
अवैध निर्माण पर चला था निगम का पंजा
मॉडल टाउन क्रॉसिंग पर स्थित जग्गी सिटी सेंटर में बनी अवैध रूप से दो दुकानों व एक शोरूम को पीले पंजे की मदद से ढहा दिया गया था। इसके अलावा कुछ अस्थायी अवैध निर्माण भी कार्रवाई के दौरान ढहाया गए थे। हालांकि पूरी कार्रवाई के दौरान निगम टीम को किसी प्रकार के विरोध का सामना नहीं करना पड़ा था। नगर निगम द्वारा सेंटर के संचालक को पूर्व में कई बार नोटिस भेजकर अवैध निर्माणों को स्वयं गिराने को कहा गया था, लेकिन समय अवधि में कोई कार्रवाई नहीं करने पर नगर निगम ने स्वयं कार्रवाई की थी।
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विवादों में सिटी सेंटर
बता दें कि निर्माण से लेकर अब तक सिटी सेंटर विवादों में रहा है। पहले निर्माण के दौरान तत्कालीन डीसी ने भी इस पर आपत्ति जताई थी, जबकि बाद में सेंटर की ऊंचाई को लेकर भी विवाद था। इतना ही नहीं यहां पर अन्य कई नियमों को धड़ल्ले से तोड़ा गया, मगर बावजूद इसके प्रशासन व नगर निगम की नाक तले यह सेंटर बन गया। आखिर किसकी शह पर सिटी सेंटर का निर्माण हो गया और सिटी सेंटर के समक्ष जीटी रोड पर सरकार ने भी स्वर्ण जयंती द्वार बनाकर इसकी शोभा में चार चांद लगा दिया है।
इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। डाक्यूमेंट नहीं होने के कारण जग्गी सिटी सेंटर का सीटीई सर्टिफिकेट रद कर दिया गया होगा।
बिपिन कुमार, एईई, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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