सैन्य प्रशासन के अधीनस्थ कैंटोनमेंट बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष अजय बवेजा पर जानलेवा हमला करने के मामले में कोर्ट ने सभी 11 आरोपियों को बरी कर दिया। मंगलवार को एडिशन सेशन जज संदीप सिंह की अदालत ने फैसला सुनाते हुए भाजपा कार्यकर्ता एवं कैंटोनमेंट बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष सुरेंद्र तिवारी सहित 11 आरोपियों को बरी करने के आदेश दिए।
इन आरोपियों में तिवारी के अलावा राहुल सोनकर उर्फ वीरू, गैरी मल्होत्रा, निखिल, रमन उर्फ चिटा, अभिनव, सतबीर, रामफल, गौरव, मनहर्ष व रोहित शामिल थे। साक्ष्यों के अभाव में यह फैसला सुनाया गया। पुलिस को दी शिकायत के अनुसार 14 अप्रैल 2017 को पार्षद अजय बवेजा स्टाफ रोड स्थित सिया वाटिका मैरिज पैलेस के कार्यालय पर बैठे थे कि अचानक एक युवक दरवाजा खोलकर भीतर आया और उसने दूसरे आरोपियों को इशारा करते हुए भीतर बुला लिया। इन युवकों में अभिनव व रोहित आदि शामिल थे।
आरोपियों ने लोहे के पाइप व तेजधार हथियारों से हमला कर दिया था। अधमरा करने के बाद वे बवेजा को छोड़कर फरार हो गए थे। सीसीटीवी में आरोपियों के कैद होने के बाद सीआईए की टीम ने आरोपियों को काबू किया था। हमले के बाद सुरेंद्र तिवारी भी हालचाल पूछने के लिए छावनी नागरिक अस्पताल पहुंचा था लेकिन उस समय तक तिवारी के हमले का मास्टर माइंड होने का खुलासा नहीं हुआ था। बता दें कि अजय बवेजा को कैंटोनमेंट बोर्ड का उपाध्यक्ष चुना गया था लेकिन कार्यकाल खत्म होने के बाद वह अब कैंटोनमेंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य हैं।
घटना के बाद भाजपा से निष्कासित हो गए थे तिवारी
सीआईए की टीम ने जब आरोपियों को काबू किया तो उन्होंने कबूला था कि इस हमले का मास्टर माइंड सुरेंद्र तिवारी था। आपसी रंजिश के चलते ही पार्षद अजय बवेजा पर हमला करने को कहा था। हालांकि दोनों ही भाजपा पार्टी के कार्यकर्ता है। भाजपा पार्षद पर हुए हमले को मंत्री अनिल विज ने गंभीरता से लिया था। पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाऊस में बैठक करते हुए सर्वसम्मति से तिवारी को पार्टी से निष्काषित कर दिया गया था।
बाद में सुरेंद्र तिवारी ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था। बाद में वह दोबारा भाजपा में शामिल हुए और गृहमंत्री अनिल विज ने गलती को माफ करते हुए दोबारा पार्टी कार्यकर्ता के रूप में स्वीकार किया था। इसी बीच अजय बवेजा व सुरेंद्र तिवारी की भी कई बार मंत्री विज के निवास स्थान पर मुलाकात हुई थी।
डीवीआर कब्जे में नहीं लिया था
दरअसल, सिया वाटिका में हुई हमले की सीसीटीवी फुटेज कोर्ट में लगी हुई थी। साफ दिखाई दे रहा था कि अजय बवेजा पर हमला हो रहा है। वकील मान सिंह काकरान ने बताया कि पुलिस द्वारा न तो सीसीटीवी का डीवीआर कब्जे में लिया था न ही असल कॉपी मधुबन लैब में जांच के लिए भेजी थी ताकि पता चल सके कि फुटेज से किसी प्रकार की छेड़छाड़ तो नहीं हुई।
वकील के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स एविडेंस पेश करने के लिए सेक्शन 65 एविडेंस एक्ट का एफिडेविट भी पेश करना होता है, वो भी पुलिस ने नहीं पेश किया हुआ था। न ही सीसीटीवी डीवीआर के बिल लगाए गए थे कि किस कंपनी से लिया। पुलिस ने अपने पक्ष में कहा था कि मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपी उस समय मौके पर पाए गए थे। ऐसे में तमाम दलीलों व अजय बवेजा की बयानों के बाद आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया गया।