अंबाला। रेलवे स्टेशन की सुरक्षा को चाक-चौबंद करने और किसी भी संभावित खतरे को टालने के लिए जीआरपी ने बड़ा अभियान चलाया है। स्टेशन परिसर की पार्किंग में लंबे समय से लावारिस हालत में खड़े लगभग 10 दोपहिया वाहनों को जीआरपी ने अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस को अंदेशा है कि ये वाहन किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते थे या फिर चोर इन्हें यहां छिपाकर भाग गए हैं।
इंजन और चेसिस नंबर से खुलेगा राज
जीआरपी के प्रभारी हरीश कुमार ने बताया कि एसपी रेलवे नितिका गहलोत के निर्देश पर सुरक्षा को लेकर यह कार्रवाई की गई है। जब्त किए गए वाहनों के मालिकों का पता लगाने के लिए अब उनके चेसिस और इंजन नंबरों का सहारा लिया जाएगा। इन नंबरों को परिवहन विभाग के केंद्रीय वाहन डेटाबेस पर सर्च किया जाएगा ताकि वास्तविक मालिकों के नाम और पते सामने आ सकें इसके साथ ही, विभिन्न थानों में दर्ज वाहन चोरी की एफआईआर से भी इन नंबरों का मिलान किया जाएगा।
तीन राज्यों के नंबरों ने बढ़ाई उलझन
पार्किंग से उठाए गए वाहनों में हरियाणा के अलावा पंजाब और हिमाचल प्रदेश के वाहन शामिल हैं। बाहरी राज्यों के नंबर होने के कारण जीआरपी के लिए चुनौती थोड़ी बढ़ गई है। जीआरपी अब पंजाब व हिमाचल राज्यों के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों और स्थानीय पुलिस नेटवर्क से संपर्क साधेगी ताकि अंतर-राज्यीय वाहन चोर गिरोहों के किसी भी कनेक्शन का पर्दाफाश किया जा सके।
सुरक्षा के लिहाज से उठाया कदम
रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर लंबे समय तक किसी अज्ञात वाहन का खड़ा रहना सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और संदिग्ध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए ही यह जब्ती की कार्रवाई की गई है। जीआरपी ने साफ किया है कि पूरी जांच और दस्तावेज के सत्यापन के बाद ही वाहनों को उनके असली मालिकों को सौंपा जाएगा।