शहीदों के गांव को दी जानी वाली सुविधाओं को देखना हो तो गांव ककराला जरूर जाएं। गांव ककराला में 20 साल पहले कारगिल के शहीद शिव कुमार के घर जाने का रास्ता आज भी कच्चा है। दो दशक में सरकार शहीद के घर तक पक्का रास्ता तक नहीं दे सकी।
अमर उजाला की टीम गांव ककराला पहुंची तो शहीद हवलदार शिव कुमार की पत्नी संतोष गोबर का तसला लेकर जाती दिखी। बरसाती मौसम में कच्चे रास्ते पर कीचड़ के पास से गुजरते हुए अपने घर पहुंची। संतोष ने बताया कि शिव कुमार की माता किस्तूरी देवी को अपने साथ रखती हैं। जब शिव कुमार शहीद हुए तब उनकी आयु करीब 28 साल रही होगी।
शहीद शिव कुमार अपने पीछे साढ़े तीन साल की लड़की और एक साल का लड़का छोड़ गए थे। अब बेटी की शादी कर विदा कर चुकी हैं। बेटा जयलाल बोलेरो गाड़ी चलाकर गुजर बसर कर रहा है। बेटे की शादी भी कर चुकी हैं। उनकी पोती भी स्कूल जा रही है।
उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से पेट्रोल पंप अलॉट हुआ था। कंपनी से विवाद के कारण अब पंप उनके पास नहीं है। शहीद के नाम की करीब 30 हजार रुपये मासिक पेंशन आ रही है। संतोष ने कहा कि मैंने अपनी सास का साथ लेकर अपने बच्चों को बड़ा किया। गांव छोड़ने की बजाए यहां रहकर ही अपने पति के सपनों को पूरा किया।
गांव ककराला में बस अड्डे के पास ही शहीद शिव कुमार की प्रतिमा लगी है। इसी पार्क में दो अन्य शहीदों की प्रतिमाएं भी हैं। कभी कभार कार्यक्रम का आयोजन हो उस समय यहां पार्क में सफाई कराई जाती है। फिलहाल इस पार्क में घास खूबसूरती का बिगाड़ने का काम कर रही है।
करीब एक किलोमीटर कच्चा रास्ता
गांव के बाहरी हिस्से में ढाणी में शहीद शिव कुमार का घर है। यहां आने के लिए करीब एक किलोमीटर तक कच्चे रास्ते से गुजरने के बाद उनके घर तक पहुंचा जा सकता है। इसी ढाणी में गांव के सरपंच का घर भी है। यहां बसे लोगों को बरसात के मौसम में सबसे अधिक परेशानी होती है।