शहर के 200 से अधिक मोबाइल टावर सील हो सकते हैं। इन टावरों को संचालित करने वाली कंपनियों ने नगर निगम में लाइसेंस फीस जमा नहीं कराई है। कुछ टावरों की फीस तो कई वर्षों से जमा ही नहीं हुई है। इतनी बड़ी संख्या में टावर सील होने से हजारों मोबाइल उपभोक्ताओं पर भी सीधा असर पड़ सकता है।
नगर निगम प्रशासन ने कोताही बरतने वाली मोबाइल टावर कंपनियों से निपटने के लिए कड़ी कार्रवाई का मन बना लिया है। इससे पहले निगम इन टावरों को संचालित करने वाली कंपनियों को लाइसेंस फीस जमा करने के लिए कई बार रिमाइंडर भेज चुका है। लेकिन इन कंपनियों की कुंभकर्णी नींद अभी तक नहीं खुली है। निगम ने इन्हें कार्रवाई से पहले फाइनल नोटिस जारी किया था, जिसे करीब ढाई महीने का समय बीत चुका है। लेकिन इस दौरान भी कंपनियों ने निगम में लाइसेंस फीस जमा करने की जहमत नहीं उठाई है।
पिछले दो वर्षों से नहीं जमा कराई लाइसेंस फीस
नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक शहर में विभिन्न कंपनियों के कुल 478 मोबाइल टावर संचालित हैं। लेकिन इनमें से करीब 200 टावर ऐसे हैं, जिनकी कंपनियों ने निगम में पिछले दो वर्षों से लाइसेंस फीस ही जमा नहीं कराई है। कुछ ने तो कई सालों से फीस जमा नहीं कराई है।
मिल चुकी है भारी छूट
सरकार ने इन मोबाइल कंपनियों को राहत देने के लिए लाइसेंस फीस में भारी छूट देते हुए नई नीति लागू कर दी है। लेकिन इसके बाद भी मोबाइल कंपनियां समय पर फीस नहीं भर रही हैं। निगम अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2010 की नीति के मुताबिक मोबाइल टावर की इंस्टॉलेशन फीस 2 लाख रुपये और रिन्युअल फीस कुल रकम की 10 प्रतिशत थी। कंपनियां इस फीस को बहुत अधिक बता रही थीं, जिसके बाद सरकार ने 3 अक्तूबर 2013 को नई नीति लागू करके इंस्टॉलेशन व प्रोसेसिंग फीस केवल 75 हजार रुपये कर दी है। लेकिन कंपनियों ने फीस भरना मुनासिब नहीं समझा।
कोट
फाइनल नोटिस दिए 75 दिन बीत चुके हैं। इसलिए अब इनके खिलाफ कार्रवाई होगी। 10 दिसंबर तक निगम में प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने की अंतिम तिथि है, इसके बाद विभाग कार्रवाई करेगा। -बीएस पंवार, जेडटीओ, नगर निगम, फरीदाबाद।