बाजार की अच्छी समझ से मिल रहा फायदा
युवा उद्यमी बाजार की मांग व जरूरत को अच्छी तरह से समझ रहे हैं। यही वजह है कि वे ऐसी फैक्टरी लगा रहे हैं, जिसका उत्पादन यहां नहीं होता, लेकिन बाजार अच्छा है। इसका फायदा यह है कि इनके उत्पाद को तुरंत बाजार मिल जाता है। आयुष की फैक्टरी में खिलौने बनते हैं, जो मार्केट में हाथों-हाथ बिक जाते हैं तो वहीं मोहित ने बोतल बंद पानी का काम शुरू किया। इनका माल भी आसपास के बाजार के अलावा बिहार में खप जाता है।
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उद्यमी श्रेय जैन ने कहा कि मैंने एक कंपनी में पांच साल तक की नौकरी की। गोरखपुर का रहने वाला हूं तो यहां गीडा में हो रहे बदलाव से वाकिफ था। कोरोना संकट के बाद नौकरी के बजाय खुद की फैक्टरी खोलने के लिए गीडा कार्यालय से संपर्क किया। जमीन मिली तो यहां प्लास्टिक के कंटेनर व जार बनाने की फैक्टरी लगाई। आसपास के बाजार की पहले से ही अच्छी जानकारी थी। लिहाजा उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने में कोई दिक्कत नहीं आई। आज फैक्टरी व मार्केटिंग टीम मिलाकर करीब 60 लोगों को रोजगार मिला है।
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उद्यमी सुधांशु टिबड़ेवाल ने कहा कि मैं एक विदेशी कंपनी में कार्यरत था। पांच साल तक नौकरी के बाद खुद की फैक्टरी लगाने का निर्णय लिया। पहले दिल्ली में कारोबार शुरू करने का लक्ष्य था, लेकिन जब गोरखपुर आकर नई दिल्ली और यहां के मार्केट की तुलना की तब लगा कि इस वक्त गीडा में काम शुरू करना ज्यादा बेहतर विकल्प है। पिछले साल डिस्पोजल पेपर बनाने का काम शुरू किया। इसका गोरखपुर व आसपास के बाजार में इतना अच्छा रिस्पांस मिला कि अब कारोबार पटरी पर आ गया है।
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गीडा सीईओ अनुज मलिक ने कहा कि अब युवा नौकरी खोजने की बजाय नौकरी देने वाले बन रहे हैं। यह पूर्वांचल के लिए अच्छी बात है। बड़ी संख्या में युवा गीडा में अपनी फैक्टरी खोल रहे हैं। फैक्टरी के लिए जमीन की तलाश में सबसे अधिक आवेदन युवाओं के ही आ रहे हैं।