फायदे: फेफड़ा मजबूत होता है। पाचन तंत्र ठीक होता है। ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ती है। गठिया के लिए फायदेमंद, तनाव और चिंता को कम करता है। लकवा, उच्च रक्तचाप आदि के दोष दूर होते हैं।
ऐसे करें: किसी ध्यानात्मक आसन पर बैठें। अनुलोम में दाहिने हाथ के अंगूठे से दाहिनी नासिका के छिद्र को बंद करके बाएं से धीरे-धीरे पांच से सात सेकेंड में पूरी सांस भरें, बाईं नासिका के छिद्र को दाहिने हाथ की अनामिका को बंद करके दाहिने से सांस को पूरा खाली करें। विलोम में दाहिने छिद्र से सांस भर कर बाएं से पूरा खाली करें। यह एक चक्र पूरा हुआ। यह अभ्यास 10 से 15 मिनट तक करें।
भ्रामरी प्राणायाम
फायदे: मानसिक शक्ति बढ़ती है और ध्यान में सहायता मिलती है।
ऐसे करें: ध्यानात्मक आसन पर बैठें। कान को अंगूठे से बंद करें, तर्जनी उंगली को ललाट पर जहां टीका लगाते हैं वहां टिकाएं, बीच वाली उंगलियां आंख और नाक के बीच में लगाकर शेष उंगलियों से आंख को ढंकें। अब गहरी सांस भरें, मुंह बंद रखें और नाक से ओम का उच्चारण करते हुऐ भौंरे के गुंजन की भांति धीमें स्वर में उच्चारण करें। यह अभ्यास कम से कम पांच बार करें।
ये बरतें सावधानी: नाखून छोटे रखें, कान को बंद करते समय ज्यादा दबाव न डालें।