कोरोना की पहली और दूसरी लहर में संक्रमण की वजह से 848 लोगों की जान चली गई। मरीजों को शुगर (मधुमेह) की बीमारी थी। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का कहना है कि जिन लोगों को शुगर है उन्हें कई अन्य बीमारियों का भी सामना करना पड़ता है। शुगर ऐसी बीमारी है जो एक बार हो जाने पर कभी खत्म नहीं होती है। इसका इलाज तो संभव है लेकिन इसे जड़ से कभी खत्म नहीं किया जा सकता है।
जानकारी के मुताबिक कोरोना संक्रमण से 848 संक्रमितों की मौत हो चुकी है। इनमें करीब 80 प्रतिशत ऐसे मरीज थे जो पहले से ही कई गंभीर बीमारियों से ग्रसित थे। इनमें 70 फीसदी मरीज शुगर की बीमारी से भी ग्रसित थे। यही वजह है कि अधिकांश मरीजों की किडनी से लेकर फेफड़े तक में संक्रमण का असर हुआ और उनकी मौत हो गई।
फिजिशियन डॉ संजीव गुप्ता ने बताया कि शुगर एक बड़ी समस्या है। मौजूदा समय में हर घर में एक न एक सदस्य शुगर की बीमारी से ग्रसित है। इसे जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता है लेकिन नियंत्रित जरूर किया जा सकता है। शुगर की बीमारी से किडनी, आंख, हृदय, ब्लड प्रेशर की समस्या शरीर में बढ़ जाती है। ऐसा होने से शरीर को काफी नुकसान पहुंचता है। मरीज की जान भी चली जाती है। बताया कि ऐसी स्थिति में शुगर और बीपी (ब्लड प्रेशर) में जरा सा भी दिक्कत होने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें। बीमारी के दौरान दवा डॉक्टरों की सलाह पर ही लें। खुद से दवा न खाएं और एहतियात बरतें। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो शुगर बढ़ने के दौरान लोगों की जान भी चली जाती है।
मोटापा भी शुगर का बड़ा कारण
डॉ. मेजर अमित कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि शुगर का एक बड़ा कारण मोटापा भी है। शारीरिक रुप से अगर फिट नहीं हैं तो शुगर का खतरा बढ़ सकता है। इतना ही नहीं अगर परिवार के किसी सदस्य को शुगर है तो आने वाली पीढ़ी को भी शुगर का खतरा है। ऐसे में जीवन शैली में बदलाव बेहद जरूरी है।