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रेलवे की गलती का खामियाजा भुगत रहे कर्मी

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रेलवे की गलती का खामियाजा भुगत रहे कर्मी
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गोरखपुर। रेलवे की गलती का खामियाजा 24 से ज्यादा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी उठा रहे हैं। परीक्षा पास करने के बाद भी ट्रैकमैन, प्वाइंटमैन, गैंगमैन और गेटमैन, चपरासी और खलासी आदि ट्रेन चलाने की जगह अभी वे रेल लाइनों पर काम करने को मजबूर हैं। रेलवे प्रशासन ने आठ ग्रुपों में पदोन्नति के लिए आयोजित परीक्षा सात ग्रुप में (सहायक स्टेशन मास्टर, लिपिक व टीटीई आदि) तैनाती की प्रक्रिया तो पूरी कर ली है लेकिन सहायक लोको पायलट और तकनीशियन के पदों पर अभी तक प्रक्रिया शुरू नहीं की है। इसे लेकर कर्मियों में नाराजगी है।
एनई रेलवे मजदूर यूनियन के महामंत्री केएल गुप्त ने प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पदोन्नति की मांग की है। पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ के महामंत्री विनोद कुमार राय ने तैनाती में देरी होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। प्रवक्ता एके सिंह ने बताया कि पूर्वोत्तर में शंटर के सैकड़ों पद खाली हैं, लेकिन रेलवे प्रशासन जानबूझकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नति नहीं कर रहा है। जबकि कुल 120 पदों पर ही पदोन्नति देनी है।
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वहीं, रेलवे प्रशासन का कहना है कि रिक्त पदों के सापेक्ष पहले ही अधिक पदों पर भर्ती कर ली गई है। अब नए सिरे से पदों का सृजन होने के बाद ही पदोन्नति की प्रक्रिया संभव है। रेलवे बोर्ड की भर्ती प्रक्रिया में लगभग एक हजार पदों के सापेक्ष पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने 1500 पदों का विज्ञापन निकाल दिया था। परीक्षा भी हो गई।
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सहायक स्टेशन मास्टर व लिपिक के पदों पर हो चुकी है पदोन्नति
पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने परीक्षा पास करने वाले 54 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को सहायक स्टेशन मास्टर और 46 कर्मियों को वाणिज्य सह टिकट लिपिक के पद पर पदोन्नति दी है। इन कर्मचारियों का प्रशिक्षण भी शुरू हो गया है। रेलवे प्रशासन योग्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को सामान्य विभागीय सीमित (जीडीसीई) परीक्षा के जरिए आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करता है।
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