कोरोना संक्रमित कुछ लोग बाद में ब्लैक फंगस का शिकार क्यों हो गए, इसका पता लगाने के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज का माइक्रोबायोलॉजी विभाग शोध करेगा। माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ अमरेश सिंह ने बताया कि कोरोना संक्रमित किन मरीजों में फंगस का असर ज्यादा रहा, ऐसे मरीजों ने स्टेरॉयड के कितने डोज लिए, कौन से ऑक्सीजन का इस्तेमाल किया, उनके शुगर की स्थिति क्या रहीं, इन सभी तथ्यों की जानकारी जुटाई जा रही है। इससे पता किया जाएगा कि आखिर ऐसे मरीजों में फंगस क्यों बढ़ा और उनकी स्थिति खराब क्यों हुई।
शोध से ब्लैक फंगस के इलाज और उसके बचाव से संबंधित सही जानकारी निकलकर सामने आ सकेगी। बता दें, ब्लैक फंगस से अब तक जिले के छह मरीजों की मौत हो चुकी है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बनाए गए पोस्ट कोविड वार्ड में फंगस के मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
यहां अब तक 30 से अधिक मरीजों का ऑपरेशन किया जा चुका है। जबकि 200 से अधिक मरीजों का इलाज चल रहा है। इन मरीजों को लगातार छह माह तक रुटीन जांच कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।
होम आइसोलेशन वाले मरीज भी हुए ब्लैक फंगस के शिकार
डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि होम आइसोलेशन वाले मरीजों को भी ब्लैक फंगस हुआ है। ऐसे मरीजों ने किस ऑक्सीजन का इस्तेमाल किया इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है। बताया कि अब तक यह बात सामने आई है कि अस्पतालों में भर्ती हुए कोरोना मरीजों को ब्लैक फंगस ज्यादा हुआ है।