ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है मिलावटी चायपत्ती की मांग, चाय की दुकानों पर अधिक खपाते हैं धंधेबाज
मिलावटी चाय की पत्ती का धंधा लाखों में चल रहा, थोड़ी लापरवाही से सेहत हो सकती खराब
महराजगंज। गोरखपुर में सख्ती बढ़ने के बाद मिलावटखोर चायपत्ती को महराजगंज में खपाया जा रहा है। गोरखपुर से मिलावटी सामान धंधेबाज जिले में मंगा रहे हैं। सस्ती चायपत्ती गोरखपुर से मंगाकर जनपद में खपाकर मोटा मुनाफा धंधेबाज कमा रहे हैं। महराजगंज के अलावा आसपास के जिलों में भी धंधेबाज चायपत्ती को खपा रहे हैं।
शहर में दुकानों पर कड़क चाय पीते हैं तो सतर्क रहिए। चाय की दुकानों पर इस्तेमाल हो रही सस्ती चायपत्ती आपके सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। हालांकि दुकानदार सस्ती चायपत्ती से होने वाले नुकसान के बारे मेें नहीं जानते हैं और महज कम कीमत की वजह से इस्तेमाल करते हैं। ब्रांडेड चाय की पत्ती 250 ग्राम खरीदने पर 140 से 165 रुपये खर्च करने पड़ेंगे। वहीं मिलावटी चाय की पत्ती इतनी रकम खर्च करने पर एक किलो मिल जाती है। सूत्रों की मानें तो केमिकल युक्त मिलावटी चाय की पत्ती का रंग भी कड़क होता है। आम उपभोक्ता के लिए समझना लगभग नामुमकिन है।
रंग देखकर हर कोई झांसे में आ जाता है। ग्राहक को लगता है कि चाय एकदम कड़क बनी है। यह चायपत्ती दुकानदारों को आसानी से उपलब्ध कराने के लिए धंधेबाजों ने व्यवस्था बना रखी है। धंधेबाज बाइक पर पीछे रखकर दुकानों तक चायपत्ती पहुंचा देते हैं और 15 दिन में एक बार रकम लेते हैं। पहले दी गई चाय की पत्ती का भुगतान करने पर दूसरी बार देते हैं। ग्राहक बनाए रखने के लिए धंधेबाजों ने अपनी पूंजी को बाजार में फंसा रखी है। महराजगंज शहर के अलावा आसपास के बाजारों में इसकी खपत आसानी से हो रही है। ग्रामीण बाजारों में इसकी मांग अधिक हो रही है। डॉक्टरों के मुताबिक लाल रंग के केमिकल से सनी मिलावटी चायपत्ती लिवर ही नहीं, मल्टी आर्गन भी फेल कर सकती है। मिलावटी चायपत्ती के धंधेबाज लाखों रुपये कमा रहे हैं।
चाय की दुकान पर काम करने वाले रामकेश ने बताया कि यदि तीन लीटर पानी में ब्रांडेड चायपत्ती 30 से 50 ग्राम प्रयोग होती है तो मिलावटी चाय की पत्ती महज एक चम्मच ही काफी है। खुली चायपत्ती सस्ती मिलती है। उसका रंग भी ग्राहकों को खूब पसंद आता है। मिलावटी चायपत्ती के इस्तेमाल से चाय गाढ़ी हो जाती है और उसका रंग बदल जाता है। चायपत्ती की मिलावट की बात पर ग्राहक रमेश शर्मा बोले, दुकानदार को तो केवल मुनाफे से मतलब है। अगर बाजार में बिना जांच-पड़ताल के सस्ती चायपत्ती बिकेगी तो वह इसी का इस्तेमाल करेंगे।
ऐसे करें मिलावटी चायपत्ती की पहचान
केएमसी मेडिकल कॉलेज के डॉ. डीसी कुशवाहा ने बताया कि मिलावटी चायपत्ती में छोटे-छोटे लाल रंग के कण दिखाई देते हैं। एक साथ दो गिलास पानी सामने रखें। एक गिलास में ब्रांडेड कंपनी की एक चम्मच चायपत्ती डालिए और दूसरे में यह जहरीली चायपत्ती। ब्रांड वाली चाय पत्ती धीरे-धीरे नीचे जाएगी और पानी में हल्का रंग उभरता है। जबकि रसायन वाली चायपत्ती घुलते ही नीचे चली जाती है और पानी हल्का लाल रंग का हो जाता है।
मिर्च पाउडर में भी हानिकारक रंग की मिलावट
सूत्रों की मानें तो मिर्च पाउडर में भी हानिकारक रंग की मिलावट होती है। अरारोट में तो महक होती नहीं, लिहाजा उसमें हींग की खुशबू वाला रसायन मिला दिया जाता है। इस मिलावट से हींग बहुत उम्दा किस्म की मालूम पड़ती है लेकिन कुछ समय बाद रसायन की महक उड़कर खत्म हो जाती है लेकिन उसका नुकसान बरकरार रहता है। थोक में असली दालचीनी 600 रुपये किलो से अधिक के भाव बिकती है जबकि नकली दालचीनी 250 से 300 रुपये प्रति किलो के भाव आती है। चीन के बिलीलीफ पौधे की छाल एकदम दालचीनी जैसी होती है।
वर्जन
जांच में हानिकारक तत्वों को मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। समय-समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। कारोबारियों को जागरूक किया जाता है।
-डॉ. टीआर रावत, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा द्वितीय