बांग्लादेश की आजादी की 50वीं वर्षगांठ गोरखपुर मंडल के सैनिकों के अदम्य साहस की कहानी के बिना अधूरी है। विजय दिवस पर यह जानना जरूरी है कि पूर्वी पाकिस्तान में मुक्ति वाहिनी के विद्रोह को दबाने पहुंची, पाकिस्तानी सेना को जिस भारतीय सेना ने महज नौ दिन में परास्त कर दिया था, उसमें कई वीर जवान गोरखपुर मंडल के थे। कुशीनगर के मेघनाथ महतो इस लड़ाई में शहीद हुए थे। इसके अलावा कई जवान घायल भी हो गए थे।
कुशीनगर जिले के सेवरही थाना क्षेत्र के धर्मपुर पर्वत गांव निवासी शहीर मेघनाथ महतो के पुत्र प्रयागनाथ को पिता का चेहरा भी याद नहीं है। प्रयागनाथ ने बताया कि वर्ष 1964 में सेना में भर्ती हुए, उनके पिता ने 1965 और 1971 की लड़ाई में हिस्सा लिया था। शहीद मेघनाथ महतो की पत्नी शिवराजी देवी बताती हैं कि उनके एकलौते पुत्र प्रयागनाथ केवल दो वर्ष के थे, जब पति शहीद हुए थे। मेघनाथ दो महीने की छुट्टी लेकर घर आए थे, लेकिन 10वें दिन ही लड़ाई शुरू होने पर ड्यूटी का तार मिला। तार मिलते ही, वे युद्ध भूमि के लिए निकल पड़े थे। 14 दिसंबर 1971 को लड़ाई के दौरान वे शहीद हो गए थे।
गोरखा राइफल्स में तैनात बांसगांव निवासी कैप्टन रामानंद साहनी और राइफल मैन तुल बहादुर थापा की ड्यूटी उस वक्त नागालैंड में थी। अचानक कंपनी कमांडर ने युद्ध की जानकारी देते हुए, पूर्वी पाकिस्तान के बार्डर पर स्थित सिलचर पहुंचने का आदेश दिया। पाकिस्तानी सेना भारत की ईएमई कोर को आगे नहीं बढ़ने दे रही थी। 24 घंटे से अधिक समय तक भारतीय सेना नदी के किनारे रुकी हुई थी। ऐसे में 4/5 गोरखा राइफल्स के जवानों की हवाई लैंडिंग नदी के आसपास कराई गई।
भारतीय सैनिकों ने वहां मौजूद सभी 35 पाकिस्तानी सैनिकों को मार दिया। इसके बाद ईएमई कोर ढाका में प्रवेश कर गई। भारतीय सेना जब आगे बढ़ी तो पाकिस्तानी फौज पिकेट छोड़कर भाग गई। चार दिसंबर को गाजीपुर पहुंचकर. रात में हमला बोला। इसी हमले में वे घायल भी हो गए। इसके अलावा राम बहादुर राय भी घायल हुए थे। नौतनवां क्षेत्र के 10 सैनिकों ने इस युद्ध में हिस्सा लिया था।
आर्मी कैंप में सम्मानित होंगे पूर्व सैनिक
विजय दिवस के उपलक्ष्य में गुरुवार यानी आज आर्मी कैंप में बांग्लादेश युद्ध में शामिल रहे सैनिकों व उनके परिजनों को सम्मानित किया जाएगा। इसमें पूर्व सैनिक सेवा परिषद गोरखपुर व महराजगंज समेत कई जगहों से अतिथि आएंगे। नेपाल से भी कुछ पूर्व सैनिक कार्यक्रम में आएंगे। यह जानकारी पूर्व सैनिक व राजीव गांधी पीजी कॉलेज में प्रशिक्षक तूल बहादुर थापा ने दी।
बोले पूर्व सैनिक--
यह युद्ध हमेशा सैनिकों को प्रेरित करता है
कैप्टन ओमप्रकाश यादव ने बताया कि बांग्लादेश की आजादी के लिए लड़ा गया, भारत-पाक युद्ध विश्व भर में सबसे चर्चित है। पाकिस्तान की सेना अत्याधुनिक असलहों और संख्या बल में भारी थी, लेकिन भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस व कुशल रणनीति के आगे वे घुटने टेकने को मजबूर हुए थे। यह युद्ध हमेशा सैनिकों को प्रेरित करता है।
पराक्रम के लिए मशहूर है भारतीय सेना
सूबेदार मेजर रमन दूबे ने बताया कि भारतीय सेना दुनिया भर में अपने पराक्रम के लिए जानी जाती है। पाकिस्तान को हर बार हमने केवल साहस से हराया है। वर्ष 1971 की लड़ाई में हमारे पास संसाधन कम थे तो 1999 की लड़ाई में परिस्थितियां एकदम प्रतिकूल थीं। इसके बावजूद दोनों युद्ध हमने जीते।
दुनिया ने माना हमारा रण कौशल
सूबेदार राजेश पांडेय ने बताया कि वर्ष 1971 की लड़ाई, भारतीय सेना के रणकौशल के लिए जानी जाती है। हमारे पास सैनिक व हथियार कम थे। अमेरिका व चीन से भी आक्रमण का खतरा था। दुनिया भर में हमारे पास मजबूत समर्थन नहीं था। इसके बावजूद हमने न सिर्फ लड़ाई जीती, बल्कि पाकिस्तानी सेना को हथियार समेत आत्मसमर्पण को मजबूर किया।