जिन लोगों ने चेचक (मिजिल्स और रुबेला) का टीका लगवाया है, उन्हें मंकी पॉक्स का खतरा 80 फीसदी तक कम है। इसकी वजह यह है कि मंकी पॉक्स के लक्षण चेचक से मिलते-जुलते हैं। लेकिन, जिन लोगों को शुगर, उच्च रक्तचाप, दमा, निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी है, उन्हें सावधान रहने की जरूरत है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि गंभीर बीमारी वाले मरीज और छोटे बच्चों को सतर्क रहने की जरूरत है। बताया कि मंकी पॉक्स होने पर गंभीरता बढ़ जाती है। इसकी वजह से अन्य बीमारियां भी हो जाती हैं। इनमें ब्रांको निमोनिया, जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी गंभीर बीमारियां शामिल हैं।
इस रोग में छाले फूटने पर अगर खुला छोड़ देते हैं, तो बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा 90 फीसदी बढ़ जाता है। हालांकि जिले में अब तक एक भी केस नहीं मिला है। यह राहत की बात है, लेकिन जिस तरह से दिल्ली सहित अन्य राज्यों में केस बढ़ रहे हैं, उससे सावधान रहने की जरूरत है।