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संतकबीरनगर जिला पंचायत: रुतबा बढ़ाने के लिए दांव पर लगा रहे प्रतिष्ठा, निर्दली चार कदम आगे

Sat, 08 May 2021 03:17 PM IST
vivek shukla शोभित कुमार पांडेय, संतकबीरनगर।

सार

संभावित दावेदार सदस्यों के घर पहुंच कर साध रहे संपर्क, हर हथकंडे अपना कर सदस्यों को अपने पाले में लाने की मुहिम हुई तेज
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संतकबीर नगर जिला पंचायत चुनाव। - फोटो : अमर उजाला।
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संतकबीरनगर जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख का पद हासिल कर समाज में रुतबा बढ़ाने के लिए दावेदारों ने राजनीतिक बिसात बिछानी शुरू कर दी है। चौराहों पर चुनावी बहस छेड़ रहे हैं तो वोटरों के घरों पहुंच कर मिन्नतें कर रहे हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख पद के दावेदारों के नाम भी चर्चा में उछलने लगे है।

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जिले में 30 जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए हैं। सपा के सात, बसपा के पांच, भाजपा के तीन और एआईएमआईएम के एक प्रत्याशी को जीत मिली है। इससे इतर सर्वाधिक सदस्य ऐसे चुने गए हैं, जो बिना किसी दल के समर्थन के चुनाव मैदान में उतरे थे।

जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए दो नाम चर्चा में आए हैं। राजनीतिक हल्कों में तीसरा नाम भी उछलने की संभावना है। वर्ष 2015 में हुए चुनाव में सपा के संतोष यादव जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। वर्ष 2017 में विधानसभा का चुनाव हुआ। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और भाजपा की सरकार बनी तो यहां लामबंदी शुरू हो गई। फिर अविश्वास प्रस्ताव पारित हुआ। जिसमें सपा के संतोष यादव से जिला पंचायत अध्यक्ष का पद छीन गया।
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उसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर दोबारा चुनाव हुआ तो भाजपा की ओर से नीना देवी दावेदारी की। जबकि दूसरे प्रत्याशी पूर्व सांसद स्वर्गीय भालचंद यादव के बेटे प्रमोद यादव रहे। इसमें भाजपा की प्रत्याशी नीना देवी जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर काबिज हुई।

इस बार किसी भी पार्टी के पास इतने सदस्य नहीं हैं, जिनके बूते अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया सकें। निर्दलियों की ओर ही सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। पार्टी से जुड़े सूत्रों की मानें तो भाजपा में प्रत्याशी की तलाश शुरू हो गई है।
 

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ब्लॉक प्रमुख पद के लिए भी रसाकसी शुरू

नौ ब्लॉकों में प्रमुख पद के संभावित दावेदारों के नाम भी उछलने लगे है। संभावित दावेदार अपने समर्थकों के साथ निर्वावित बीडीसी सदस्यों के घरों पर पहुंच रहे है। सदस्यों को अपने पाले में लाने के लिए जोड-तोड़ की राजनीति शुरू कर दिए है।

जिले में एक ब्लॉक अनुसूचित महिला है और एक ब्लॉक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। जबकि एक ब्लॉक पिछड़ा वर्ग महिला और दो ब्लॉक पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित है। इसके अलावा एक ब्लॉक महिला और तीन ब्लॉक अनारक्षित है। प्रमुख पद के लिए आरक्षित सीटों पर दिग्गज अपने करीबियों को चुनाव में उतार कर जीत दिलाने की तैयारी में जुट गए है।

सपा ने आठ तो भाजपा ने गंवाई तीन सीटें  
जिला पंचायत सदस्य पद के लिए इस बार 30 वार्डो में चुनाव हुआ। जिसमें सपा को सात, बसपा को पांच,भाजपा को तीन और एआईएमआईएम को एक सीटे मिली। जबकि 14 सीटों पर निर्दलीय चुनाव जीते। कांग्रेस पार्टी का तो पत्ता ही साफ हो गया।

जबकि वर्ष 2015 के चुनाव में जिला पंचायत सदस्य पद के लिए 32 वार्डो में चुनाव हुआ था। जिसमें सपा को 15, बसपा को पांच,भाजपा को छह और पीस पार्टी को दो सीटे मिली थी। जबकि चार सीटों पर निर्दलीय चुनाव जीते थे। ऐसे में देखा जाए तो इस बार के चुनाव में सपा को सबसे अधिक नुकसान हुआ है।

सपा को आठ सीटे गंवानी पड़ी। जबकि भाजपा को तीन सीटों का नुकसान हुआ है। बसपा को न तो नफा हुआ और न ही नुकसान। कांग्रेस का तो सूपडा ही साफ हो गया। इस बार के चुनाव में खास बात यह रही कि जनता ने निर्दलियों पर अधिक भरोसा जताया है। 14 सीटों पर निर्दलियों ने परचम लहरा कर सभी को चौंका दिया है। यहीं वजह है कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में संभावित दावेदारों की नजर निर्दलीय प्रत्याशियों की ओर से सबसे अधिक टिक गई है।

संतकबीरनगर जिला पंचायत सदस्य कुल सीट 30
निर्दल- 14
सपा- 07
बसपा- 05
भाजपा- 03
एआईएमआईएम- 01
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