गोरखपुर ग्रामीण द्वितीय, कुशीनगर और महाराजगंज के 11 फीडरों में जमकर हो रही बिजली चोरी, कुछ अभियंताओं, कर्मचारियों की मदद से चंद लोग करते हैं चोरी, भुगतते हैं सभी विद्युत उपभोक्ता, चेयरमैन के निर्देश पर जोेन के हिसाब से अलग अलग बिजलीघर के फीडरों में बिजली चोरी की समीक्षा की गई।
बिजली निगम के कुछ अभियंताओं, कर्मचारियों की मदद से गोरखपुर जोन के कुशीनगर, महाराजगंज और ग्रामीण खंड में उपकेंद्रों के 11 फीडरों पर 98 प्रतिशत तक बिजली चोरी (एटीएंडसी) हो रही है। इस संबंध में किए गए एक सर्वे की रिपोर्ट में जोन के अलावा पूर्वांचल के अन्य जोन में भी बिजली चोरी मिली है। निगम का मानना है कि बिजली चोरी के मामलों में स्थानीय लाइनमैन, अवर अभियंता को जानकारी न हो, ये संभव नहीं है। अब इस पर एमडी की तरफ से अभियंताओं से लेकर उपखंड अधिकारी, अवर अभियंता व अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। सभी से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
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उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने अपनी तरफ से एक ऑडिट करवाया था। इसमें था कि जितनी बिजली खरीदी जाती है और अलग-अलग जोन को दी जाती है, क्या उसके बदले विद्युत मूल्य पर्याप्त जमा होता है? इस समीक्षा रिपोर्ट में जोन के कई उपकेंद्र के फीडर इलाकों में जमकर लाइन लॉस मिला। इसका मतलब कि बिजली फीडर से स्वीकृत उपभोक्ताओं के कनेक्शन लोड की क्षमता के हिसाब से बिजली तो दी जा रही, लेकिन राजस्व जमा नहीं हो पा रहा।
बिजली चोरी की जा रही है। ऑडिट से पता चला कि मिलीभगत से कुछ लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर बिजली चोरी की जा रही है। ऐसे इलाकों में विद्युत घाटा कम करने के लिए ऑफ द रिकार्ड विभाग कटौती ज्यादा करता है, जिसका खामियाजा उन उपभोक्ताओं को भी उठाना पड़ता है, जो ईमानदारी से उपयोग की गई पूरी बिजली केबिल का भुगतान करते हैं।
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विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, सबसे अधिक बिजली चोरी कुशीनगर जिले में हाटा खंड के रमकोला बिजलीघर के सिंघाड़ा फीडर पर है। यहां 98 प्रतिशत तक बिजली चोरी की गई। इसके अलावा सपहा उपकेंद्र के बैरिया फीडर में 96 प्रतिशत बिजली चोरी मिली। निगम के अधिकारियों का प्रयास है कि चेकिंग अभियान चलाकर या अन्य उपायों से बिजली चोरी पर रोक लगाई जाए। इससे राजस्व वसूली में वृद्धि हो सके। जितनी बिजली उपकेंद्रों से फीडर तक दी जाए, उसमें 85 प्रतिशत तक राजस्व जमा हो सके।
क्या होता है लाइन लॉस
बिजली निगम के अधिकारियों के मुताबिक, लाइन लॉस की गणना के लिए एक मानक है। उपकेंद्र से फीडर तक जाने वाली कुल बिजली, उपयोग की गई बिजली, उपभोक्ताओं के यहां मीटर में हुई रीडिंग और जमा हुए बिल की गणना की जाती है। उदाहरण, जैसे किसी फ़ीडरको 100 यूनिट बिजली गई और मीटर रीडिंग 80 यूनिट की ही आई तो 20 यूनिट बिजली चोरी हो गई। जिन इलाकों में गणना की गई है वहां 98 प्रतिशत तक लाइन लॉस है। मतलब 100 यूनिट बिजली खपत में सिर्फ 2 यूनिट का बिल ही बन रहा।
लाइन लॉस कैसे रोका जा सकता
बिजली लाइन की बराबर मरम्मत की जाए, कमजोर व जर्जर तार समय समय पर बदले जाएं, अधिक ज्वाइंट न हो, स्पार्किंग पर तुरंत समाधान
हो, ट्रांसफार्मर स्वीकृक लोड के अनुसार लगाया जाए।
जोन में बिजली चोरी वाले फीडर
खंड उपकेंद्र का नाम फीडर का नाम एटीएंडसी हानि( बिजली चोरी)
गोरखपुर ग्रामीण घनघटा सतुआभार 85.65 प्रतिशत
गोरखपुर ग्रामीण सेवई बाजार सेवई बाजार 89.65 प्रतिशत
गोरखपुर ग्रामीण कौड़ीराम डेरवा 84.50 प्रतिशत
कुशीनगर( हाटा) सपहा बैरिया 96.19 प्रतिशत
कुशीनगर( हाटा) रमकोला लक्ष्मीगंज 98.87 प्रतिशत
कुशीनगर( हाटा) रमकोला सिंगहा 76.16 प्रतिशत
कुशीनगर( हाटा) रमकोला टेकुआटर 95.26 प्रतिशत
कुशीनगर( कसया) फाजिलनगर साउथ न्यू 78.63 प्रतिशत
महाराजगंज चौक डरहाटा 83.89 प्रतिशत
महाराजगंज चेहरी खुटहा 79.38 प्रतिशत
महाराजगंज मुख्यालय मुख्यालय 91.89 प्रतिशत
मुख्य अभियंता राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि जोन के जिन इलाकों में लाइन लॉस की दिक्कते आई हैं, उन्हें पत्र भेजा गया है। सभी से दो कार्य दिवसों में स्पष्टीकरण मांगा गया है। समय से नहीं आने पर सभी जिम्मेदारों को चार्जशीट दिया जाएगा।