चुनाव में सफलता के लिए नेता कैसे-कैसे दांव आजमाते हैं, इसका एक नमूना पंचायत चुनाव में दिखा। अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों पर उम्मीदवार बनाने के लिए कुछ लोगों ने दूसरे प्रांत की अनुसूचित जनजाति की लड़की से शादी कर ली लेकिन इनमें से कुछ की किस्मत खराब निकली।
हाईकोर्ट के निर्देश पर दोबारा हुए सीटों के आरक्षण में पहले आरक्षित रहे 23 गांवों का आरक्षण ही बदल गया। अब एसटी लड़की से शादी के बाद भी बेचारे चुनाव लड़ने से वंचित हो गए।
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में अनुसूचित जनजाति की आबादी न के बराबर है लेकिन 2011 जनगणना की रिपोर्ट के अनुसार यहां 68 हजार लोग अनुसूचित जनजाति श्रेणी के हैं। हालांकि यह आंकड़े किन लोगों के हैं, यह आज भी रहस्य है। माना जाता है कि कुछ जिलों में गोड़ व खरवार जाति को अनुसूचित जनजाति श्रेणी में रखा गया है और तकनीकि त्रुटिवश कुशीनगर में भी इन जातियों के लोग अनुसूचित जनजाति श्रेणी में गिन लिए गए होंगे।