सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : amar ujala
अयोध्या की सियासत एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। सपा मुखिया अखिलेश यादव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच अयोध्या से विधानसभा चुनाव लड़ने की चुनौती ने प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा छेड़ दी है। दोनों नेताओं के बयानों ने अयोध्या को संभावित सियासी मुकाबले के केंद्र में ला दिया है। यह महज दो नेताओं के बीच चुनावी चुनौती का मामला नहीं है। इसके पीछे राम मंदिर, हिंदुत्व, विकास और पूर्वांचल-अवध की राजनीतिक जमीन से जुड़े कई सवाल हैं।
तीन दिन पहले अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। शनिवार को मुख्यमंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि अखिलेश यादव खुद अयोध्या से चुनाव लड़ें। अयोध्या जन्मभूमि आंदोलन से लेकर राम मंदिर निर्माण तक भाजपा की राजनीति का प्रमुख केंद्र रही है। गोरक्षपीठ का राम जन्मभूमि आंदोलन से पुराना जुड़ाव रहा है। महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ इस आंदोलन से जुड़े रहे। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री रहते अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और शहर के विकास कार्यों ने भी इसे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रखा है।
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. एस के द्विवेदी का कहना है कि यदि अखिलेश यादव ने चुनौती दी है और योगी आदित्यनाथ ने उसे स्वीकार किया है, तो दोनों को अयोध्या से चुनाव लड़ना चाहिए। इससे एक स्वस्थ जनतांत्रिक परंपरा स्थापित होगी। जनता जो निर्णय देगी, उसका स्वागत होगा। अखिलेश यादव को सैफई से बाहर निकलकर अयोध्या आना चाहिए योगी को गोरखपुर से निकल कर बाहर आना चाहिए। भाजपा के लिए संभावित मुकाबले का असर केवल अयोध्या तक सीमित रखने के बजाय अवध से पूर्वांचल तक राजनीतिक संदेश देने की रणनीति से जुड़ सकता है।
वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के वाराणसी से चुनाव लड़ने के बाद पूर्वांचल की राजनीति में वाराणसी की भूमिका चर्चा में रही थी। हालांकि, अयोध्या में विधानसभा चुनाव का समीकरण और उसका क्षेत्रीय प्रभाव अलग-अलग स्थानीय परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा। दूसरी ओर, अखिलेश यादव अयोध्या में सपा की चुनावी सफलता को आधार बनाकर अपनी स्थिति मजबूत करने का दावा कर सकते हैं। उनके लिए यह चुनौती स्वीकार करना पार्टी की राजनीतिक रणनीति और स्थानीय समीकरणों से जुड़ा सवाल होगा। यदि दोनों नेता अयोध्या से चुनाव लड़ते हैं, तो राम मंदिर, सामाजिक समीकरण, विकास और सरकार के कामकाज पर बहस और तेज हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय- अवध से लेकर पूर्वांचल होगा असर
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अमित उपाध्याय मानते हैं कि योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव को अयोध्या से लड़ने की चुनौती देकर अपना आत्मविश्वास दिखाया है। राम मंदिर निर्माण में गोरक्ष पीठ की अहम भूमिका रही है। यदि अखिलेश यह चुनौती स्वीकार करते हैं, तो हिंदुत्व एक बड़ा मुद्दा बनेगा। सपा सरकार के दौरान हुई घटनाएं भी विमर्श के केंद्र में आएंगी। योगी के अयोध्या से चुनाव लड़ने पर अवध से लेकर पूर्वांचल तक खासा असर पड़ेगा। इससे भाजपा के लिए चुनाव में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।