दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (गोविवि) के कुलपति प्रो. राजेश सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर मोर्चा खोलने वाले हिंदी विभाग के आचार्य प्रो. कमलेश कुमार गुप्त को मंगलवार को निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि के दौरान प्रो कमलेश कला संकाय से संबद्ध रहेंगे। कला संकाय में ही उपस्थिति दर्ज कराएंगे। प्रो कमलेश पर लगे आरोपों की जांच तीन सदस्यीय कमेटी करेगी। इसमें दो पूर्व कुलपति और एक कार्य परिषद सदस्य शामिल किए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक प्रो. कमलेश कुमार गुप्त मंगलवार को गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के सामने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के पास करीब चार घंटे तक धरने पर बैठे रहे। प्रो. गुप्त लंबे समय से कुलपति के खिलाफ सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं। इसके लिए उन्हें पहले ही आठ नोटिस मिल चुके हैं। लिहाजा, प्रो. गुप्त ने गत सोमवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के सामने सत्याग्रह की चेतावनी दी थी।
कुलपति को हटाने की मांग को लेकर प्रो. गुप्त मंगलवार सुबह 11 बजे धरने पर बैठने आए तो उन्हें अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अजय सिंह ने रोकने की कोशिश की। करीब एक घंटे तक दोनों के बीच बहस चलती रही, लेकिन प्रो गुप्त नहीं माने और प्रतिमा के पास धरने पर बैठ गए। इसे विश्वविद्यालय प्रशासन ने अनुशासनहीनता व दायित्व निर्वहन के प्रति घोर लापरवाही करार दिया। साथ ही कुलपति के आदेश पर कुल सचिव विश्वेश्वर प्रसाद ने हिंदी विभाग के प्रोफेसर कमलेश गुप्त को निलंबित करने व उनके खिलाफ विभागीय जांच का आदेश जारी कर दिया।