ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम के लगने के बाद लोको पायलट को तीन के बजाय चार सिग्नल दिखेंगे। एक किमी पीछे वाली ट्रेन के लोको पायलट को पहला सिग्नल रेड दिखेगा, फिर डबल येलो सिग्नल दिखेगा। इससे आगे बढ़ने पर येलो और फिर ग्रीन सिग्नल दिखने लगेगा। एक ब्लॉक 10 किमी का होता है। इस तरह तीन से चार ट्रेनें एक साथ चलने लगेंगी। अभी एक ही ट्रेन चलती है।
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दो ब्लॉक के बीच बनेंगे हट
गोरखपुर से लखनऊ के बीच हर दो ब्लॉक के बीच एक हट बनाए जाएंगे। हट में सिग्नल से जुड़े संयंत्र रखे जाएंगे, ताकि सिग्नल में कोई फाल्ट आए तो तत्काल ठीक कर लिया जाए। इसमें सिग्नल भी पहले लाल फिर डबल पीला, पीला और इसके बाद हरा रहेगा। इसे देखकर ड्राइवर ट्रेन को एक किमी के पीछे दूसरी ट्रेन चला सकेंगे।
पूर्वाेत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य मार्ग छपरा से बाराबंकी के मध्य ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम लगाने का कार्य तेजी से चल रहा है। कुछ भाग इस वित्त वर्ष में पूरा कर ओपन कर दिया जाएगा। इसके तैयार हो जाने से लाइन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और खंड की गति बढ़ाने में भी यह सहायक होगा।