अनुमानित टैक्स 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा
वाणिज्यकर विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर अमित कुमार सिंह बताते हैं कि फर्मों का अनुमानित टैक्स 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। दरअसल विभाग अपने अभिलेखों के अनुसार आंकलन कर टैक्स लगाता है। संबंधित व्यापारी अपने अभिलेख प्रस्तुत करते हैं। अनुमानित टैक्स व उपलब्ध रिकार्ड की जांच के बाद वास्तविक कर का निर्धारण कर जमा कराया जाता है।
व्यापारी वर्ग परेशान: रिजवी
टैक्स बार एसोसिएशन गोरखपुर के अध्यक्ष एजाज रिजवी का कहना है कि विभाग की इस एकतरफा कार्रवाई से व्यापारी वर्ग काफी परेशान है। कुछ मामले तो ऐसे हैं, जिनमें अभिलेख प्रस्तुत करने पर पूरा बकाया ही समाप्त हो जा रहा है। इस मामले में जल्द ही वे अफसरों से मिलकर कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग करेंगे।
वाणिज्यकर विभाग कर वसूली असिस्टेंट कमिश्नर सत्यमेव जयते ने कहा कि व्यापारियों पर जीएसटी के अलावा वैट भी बकाया है। तीन साल से पुराने बकायों की वसूली के लिए नोटिस भेजा जा रहा है, जिनका टैक्स नियमानुसार जमा है, वे अपने अभिलेख प्रस्तुत करें। शेष व्यापारी समय से बकाया जमा कर दें, ताकि अन्य कठोर कार्रवाई का सहारा न लेना पड़े।