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Akshaya Navami: अक्षय नवमी आज, आवंले के वृक्ष की होगी पूजा

Sat, 13 Nov 2021 08:34 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

श्रद्धालु आवंले के वृक्ष के नीचे भोजन बनाकर करेंगे भोजन, आनंद नामक महाऔदायिक योग से व्रत और पूजन के लिए है उत्तम दिन।
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अक्षय नवमी पर आंवला वृक्ष का पूजन करती महिलाएं। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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अक्षय नवमी शनिवार को मनाई जाएगी। ऐसी मान्यता है कि अक्षय नवमी के दिन आंवले के वृक्ष की पूजा एवं इसके नीचे भोजन बनाने व ग्रहण करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इस दिन स्नान, पूजन, तर्पण औरअन्नादि के दान से अक्षय फल प्राप्त होता है। इस दिन भगवान लक्ष्मीनारायण के पूजन का भी विधान है।

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वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन नवमी तिथि का मान सुबह नौ बजकर 37 मिनट तक पश्चात दशमी तिथि है। इस दिन शतभिषा नक्षत्र संपूर्ण दिन और शाम सात बजकर 41 मिनट तक है। इस दिन आनंद नामक महा औदायिक योग भी है। ऐसे में पूर्ण प्रशस्त और उत्तम दिन के रूप मे मान्य रहेगा।

ये है महत्व
पंडित अवधेश मिश्रा के अनुसार, हिंदू धर्म के सबसे बड़े अनुष्ठानों में एक अक्षय नवमी को भी माना गया है। अक्षय नवमी के दिन किए दान या किसी धर्मार्थ कार्य का लाभ व्यक्ति को वर्तमान और अगले जन्म में प्राप्त होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, अक्षय नवमी के दिन सतयुग प्रारंभ हुआ। इसके साथ ही एक अन्य कल्प में इसी दिन त्रेतायुग का भी प्रारंभ हुआ था। इस दिन को किसी भी पुण्य कार्य के लिए अनुकूल और शुभ समय माना जाता है।
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अक्षय नवमी पूजन विधि विधि
पंडित अरविंद गिरि के अनुसार, इस दिन सुबह उठकर स्नानादि के बाद दाहिने हाथ में जल, अक्षत, पुष्प आदि लेकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद धात्री वृक्ष (आंवले) के नीचे पूर्व दिशा की ओर मुखकर बैठें। ‘ऊॅ धात्र्यै नम:’ मंत्र का जप करते हुए षोडशोपचार पूजन कर आवंले के वृक्ष की जड़ में दूध से जलाभिषेक करते हुए पितरो का तर्पण करें।

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