सबसे बड़ी बात है कि यह कोई बड़ी रकम की जालसाजी नहीं करते हैं, यही वजह है कि वारदात के बाद भी पकड़े नहीं जाते थे। इसके पीछे की सोच रवि ने बताया कि ज्यादा रुपये की खरीदारी या जालसाजी करने पर पीड़ित दौड़ भाग करते है तो पुलिस जांच तेज करती है। इसका कहना है कि पुलिस से बचने के लिए छोटी रकम ही निकालते थे। कभी भी 50 हजार से ज्यादा की जालसाजी नहीं की। रकम को घूमने में खर्च किया जाता था। बचने पर बराबर-बराबर बांट लिया जाता है।
ऐसे करते थे जालसाजी
एसओ मदन मोहन मिश्रा ने बताया कि आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसके गिरोह में तीन अन्य लोग भी शामिल है। ये सभी हरियाणा से कार से आकर वारदात को अंजाम देते थे और फिर चले जाते थे। हरियाणा से आने के बाद दो-दो की संख्या में अलग-अलग हो जाते थे। इनके पास अलग-अलग बैंक के एटीएम कार्ड होते है और फिर बुजुर्गों को टारगेट करते है।
खासतौर पर सुनसान वाले जगह के एटीएम बूथ पर जाते हैं। वहां पर मदद के बहाने एटीएम कार्ड को बदल देते है और फिर खाते से रकम खाली कर देते हैं। आरोपी ने बताया कि पहले एटीएम में छेड़छाड़ कर देते हैं, जिससे एटीएम से तुरंत पैसा नहीं निकलता है। फिर से पिन कोड को जान लेते हैं और मदद के बहाने एटीएम कार्ड को बदल देते है। फिर किसी अन्य एटीएम पर जाकर रुपये निकाल लेते हैं।