तेंदुए के पैर के निशान।
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करीब तीन दिन पहले गांव के लोग एक तेंदुआ को विचरण करते देखे थे। तेंदुआ का पदचिह्न देखकर लोगों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी थी। मदनपुर सुकरौली गांव के सुग्गन यादव, राजेश यादव, तिलकधारी, भुअरी और रामनरेश आदि ने बताया कि सोमवार व मंगलवार को तेंदुआ को रामअवध यादव के खेत के पास देखकर शोर मचाया था। सूचना वन विभाग को भी दी गई थी, लेकिन वन विभाग की तरफ से केवल सावधानी बरतने की सलाह देकर मामले से पल्ला झाड़ लिया गया था। लोग सवाल उठा रहे हैं कि समय रहते वन विभाग ने जरूरी कदम उठाया होता तो कोईली की जान बच जाती।
खड्डा से सटा है बिहार और महराजगंज का वन्य क्षेत्र
बिहार का वाल्मीकि टाइगर रिजर्व और महराजगंज का सोहगीबरवा वन्यजीव अभयारण्य खड्डा क्षेत्र से सटा है। इन जंगलों की सीमा खुली है। इसके चलते जानवर निकलकर रिहाइशी इलाके में चले आते हैं। पिछले वर्ष मार्च में लखुआ लखुई गांव में तेंदुआ घुस गया था। तीन दिनों तक उत्पात मचाते हुए सात लोगों को घायल कर दिया था। वन विभाग ने पिंजरा मंगाकर पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली और तेंदुआ लापता हो गया। इसके कुछ दिन बाद तेंदुआ भेड़ीजंगल गांव के सरेह में पहुंचकर कई लोगों को घायल कर दिया था।
उसे पकड़ने के लिए गोरखपुर, महराजगंज, कुशीनगर की वन विभाग की टीम दो दिनों तक मशक्कत करती रही। रेस्क्यू के दौरान रेंजर खड्डा वीके यादव पर तेंदुआ ने हमला कर घायल कर दिया था। सिसवा क्षेत्र में भी कई लोगों को घायल कर दिया था। जून में जंगल से निकला तेंदुआ शिवपुर गांव में घुस गया और एक महिला सहित तीन लोगों को घायल कर दिया था। तेंदुए की भी मौत हो गई थी।
कुछ वर्ष पहले भी लक्ष्मीपुर पड़रहवा, सोहरौना, सिसवा गोपाल, तुर्कहा, हनुमानगंज, गंगवाछापर, पकड़ी बृजलाल, खड्डा कस्बे के लोहिया नगर आदि जगहों पर समय-समय पर तेंदुए ने लोगों को घायल किया था तथा पशुओं को मार डाला था। सटे बिहार में भी जंगल से निकलकर बाघ व अन्य हिंसक जानवर लोगों के जीवन पर संकट पैदा करते रहते हैं।
खड्डा वन विभाग के पास पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं है। हिंसक जानवरों को पकड़ने के लिए कर्मचारी डंडा लेकर जाते हैं। गंडक नदी व दो जंगलों से सटे लगभग डेढ़ सौ गांवों में फैले खड्डा वन रेंज में हिंसक जानवर अक्सर घुस आते हैं। जब कोई हिंसक पशु आता है तो महराजगंज जिले से संसाधन व कर्मचारी मंगाना पड़ता है। इसमे समय व धन दोनों बर्बाद होता है। खड्डा वन कार्यालय पर सभी संसाधन उपलब्ध कराने की मांग काफी दिनों से चल रही है।
मृतका के परिजनों को दी जाएगी सहायता राशि
डीएफओ अनिल श्रीवास्तव और रेंजर खड्डा वीके यादव ने बताया कि तेंदुए के हमले से मरी महिला के परिजनों को मान्य सहायता राशि दी जाएगी। तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा मगाया जा रहा है। महराजगंज के वन विभाग का भी सहयोग लिया जा रहा है। खड्डा वन कार्यालय पर संसाधन की कमी है। लोगों को सलाह दी गई है कि अकेले खास कर महिला व बच्चे सरेह की ओर न जाएं। पुरुष जाएं तो झुंड में ही जाएं। वन विभाग के कर्मचारियों की टीम तैनात की गई है।