उत्तर प्रदेश के महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत जिले से नेपाल की 570 किलोमीटर सीमा लगी है। दोनों देश में आने-जाने के लिए सोनौली, खूंनवा, रुपईडीहा के अलावा 300 से अधिक पगडंडियां हैं। इन रास्तों से देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों के घुसपैठ करने व तस्करी की आशंका बनी रहती है।
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पगडंडियों पर बढ़ाई गई गश्त
पगडंडी के रास्ते भारत में आने और यहां से जाने वालों पर एसएसबी, खुफिया एजेंसियों के अलावा स्थानीय पुलिस नजर रख रही है। एडीजी के निर्देश पर नेपाल सीमा से सटे थानों की पुलिस अपने क्षेत्र में एसएसबी के साथ पेट्रोलिंग कर रही है।
भारत-नेपाल सीमा पर आयात-निर्यात के लिए निर्धारित केंद्र बनाए गए हैं। इन्हें इनलैंड कस्टम स्टेशन (अंतरदेशीय सीमा शुल्क केंद्र) कहते हैं। कोई भी व्यापारी या दलाल बगैर आइईसी (आयात-निर्यात कोड) प्रमाणपत्र के आयात नहीं कर सकता। सामान्य तौर पर चावल, गेहूं, फल व सब्जियां भारत से नेपाल निर्यात की जाती हैं तो नेपाल से जड़ी-बूटी, तेजपत्ता, दालचीनी आदि का आयात होता है। टमाटर का भारत से नेपाल को निर्यात तो किया जा सकता है, लेकिन आयात प्रतिबंधित है।