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UP Election 2022: गोरखपुर और बस्ती मंडल के सात जिलों में 15 वर्तमान विधायकों के टिकट कटे

Fri, 11 Feb 2022 01:22 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

टिकट काटने में भाजपा सबसे आगे, सात जिलों में विधानसभा की हैं 41 सीटें।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock
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विस्तार
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विधायकों का टिकट काटने के मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आगे रही है। भाजपा व उसके सहयोगी अपना दल (एस) ने गोरखपुर-बस्ती मंडल के सात जिलों में 15 विधायकों का टिकट काट दिया है। दोनों मंडलों में विधानसभा की 41 सीटें हैं। कुछ सीटें भाजपा की सहयोगी दलों को मिली हैं, लेकिन सभी पुराने विधायकों को टिकट नहीं दिया गया है। भाजपा नेतृत्व का कहना है कि संगठन में काम करने वाले ऊर्जावान कार्यकर्ताओं को मौका दिया गया है।

गोरखपुर: 50 फीसदी विधायकों का टिकट कटा

भाजपा ने गोरखपुर के 50 फीसदी विधायकों का टिकट काट दिया है। जिले में विधानसभा की नौ सीटें हैं। 2017 के चुनाव में भाजपा ने आठ सीटें जीती थीं। इनमें से चार वर्तमान विधायकों को टिकट नहीं मिला है। शहर विधानसभा क्षेत्र से विधायक डॉ आरएमडी अग्रवाल, चौरीचौरा से विधायक संगीता यादव, सहजनवां से विधायक शीतल पांडेय और खजनी से विधायक संत प्रसाद को टिकट नहीं दिया गया है।

संतकबीरनगर: एक विधायक का टिकट कटा, श्रीराम की सीट बदली

मेंहदावल से भाजपा विधायक राकेश सिंह बघेल का टिकट काट दिया गया है। यह सीट भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी के खाते में गई है। नए प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। खलीलाबाद से भाजपा विधायक जय चौबे ने सपा का दामन थाम लिया है। भाजपा ने इस सीट से नए प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारा है। इसी तरह योगी सरकार में मंत्री व धनघटा (सुरक्षित) सीट से विधायक श्रीराम चौहान की सीट बदल गई है। अब उन्हें गोरखपुर की खजनी (सुरक्षित) सीट से चुनाव लड़ाया जा रहा है।

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सिद्धार्थनगर: अपना दल के विधायक का टिकट कटा

शोहरतगढ़ से अपना दल (एस) के विधायक अमर चौधरी को टिकट नहीं दिया गया। लिहाजा, अमर ने पार्टी से किनारा कर लिया। उन्होंने सपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। सपा ने शोहरतगढ़ की जगह बांसी से प्रत्याशी बना दिया। इससे अमर असहज हो गए। नतीजा रहा कि बांसी से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। साथ ही शोहरतगढ़ से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन कराया है। इस जिले में विधानसभा की पांच सीटें हैं। 2017 के चुनाव में भाजपा ने चार व उसके सहयोगी दल ने एक सीट जीती थी। भाजपा ने सभी विधायकों पर भरोसा जताया है।

बस्ती: विधायक की जगह पत्नी को मैदान में उतारा

रुधौली से भाजपा विधायक संजय प्रताप जायसवाल को इस बार टिकट नहीं मिला है। इस सीट से विधायक की पत्नी संगीता प्रताप जायसवाल को चुनाव मैदान में उतारा है। जिले में विधानसभा की पांच सीटें हैं। 2017 के चुनाव में भाजपा ने सभी सीटें जीती थीं। चार विधायकों पर भाजपा ने फिर भरोसा जताया है।

महराजगंज: चार विधायकों पर फिर जताया भरोसा

भाजपा ने चार वर्तमान विधायकों पर फिर भरोसा जताया है। 2017 में चुनाव जीतने वालों को दोबारा टिकट दिया गया है। नौतनवां विधानसभा सीट से निर्दलीय अमन मणि त्रिपाठी को जीत मिली थी। यह सीट भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी के खाते में गई है। निषाद पार्टी ने प्रत्याशी के नाम का एलान कर दिया है।

 
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कुशीनगर: चार विधायकों का टिकट कटा, एक ने पार्टी छोड़ी

पडरौना से भाजपा विधायक स्वामी प्रसाद मौर्य ने सपा का दामन थाम लिया है। वह पडरौना की जगह फाजिलनगर से चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने इस बार विधायक गंगा सिंह कुशवाहा को टिकट नहीं दिया है। विधायक की उम्र ज्यादा थी। लिहाजा, विधायक के बेटे को चुनाव मैदान में उतारा है। कुशीनगर से विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी को भी दोबारा मौका नहीं मिल सका।

हाटा से विधायक पवन केड़िया के टिकट पर कैंची चल गई है। खड्डा से विधायक जटाशंकर त्रिपाठी को इस बार मौका नहीं मिला है। यह सीट भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी के खाते में गई है। निषाद पार्टी ने नया प्रत्याशी बनाया है। रामकोला सुरक्षित सीट भाजपा की सहयोगी सुभासपा के खाते में थी। सुभासपा के रामानंद बौद्ध को जीत भी मिली थी, लेकिन इस बार सुभासपा सपा के साथ है। लिहाजा, भाजपा ने नया प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारा है। तमकुहीराज सीट कांग्रेस के पास थी।


देवरिया: भाजपा ने चार विधायकों का टिकट काटा

बरहज से भाजपा विधायक सुरेश तिवारी का टिकट कटा है। वह अब बसपा में शामिल हो गए हैं। देवरिया सदर से उपचुनाव में जीतने वाले डॉ सत्य प्रकाश मणि त्रिपाठी का टिकट भी काटा गया है। रामपुर कारखाना से भाजपा विधायक कमलेश शुक्ला को दोबारा मौका नहीं मिला है। सलेमपुर (सुरक्षित) सीट से विधायक काली प्रसाद को भी टिकट नहीं मिला है। पथरदेवा और रुद्रपुर के विधायकों को दोबारा टिकट मिला है। दरअसल, देवरिया में विधानसभा की सात सीटें हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने छह सीटें जीती थीं। एक सीट सपा के खाते में गई थी। भाजपा ने छह में चार विधायकों को टिकट नहीं दिया है।
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