स्थानीय गांव निवासी बीरबल दोनो आंख से दिव्यांग हैं। महादेवा ताल में नाव पलट जाने के कारण चार संतानों में सबसे बड़ी रीतू की डूबने से मौत हो गई। जानकारी होने पर बीरबल बदहवास हो गए। पिता बीरबल का कहना था कि ऐसा नहीं सोचा था कि बिटिया की डोली की जगह अर्थी उठेगी।
आंख खराब होने से बिटिया का शव भी नहीं देख पाने का मलाल है। हादसे में तीन मौतों के कारण गांव और रिश्तेदारी में कोहराम मचा हुआ है। रात में ही नंदन और लालमन के परिजन शव लेकर गांव चले गए। जबकि रीतू का दाह-संस्कार बरहज सरयू तट पर किया गया।