जितेंद्र ने जेल में रहने के दौरान संपर्क में आए गोंडा के बजीरगंज के सुदामापुर निवासी रामगोपाल जायसवाल से बाइक ली। फिर रुद्रापुर के बेलकुंडा निवासी विनय यादव से तमंचा हासिल कर गौतम से एक सिम ले लिया। फिर इसी सिम से जितेंद्र ने अपने साढ़ू संतराज गुप्ता के मोबाइल पर फोन कर जान से मारने की धमकी देकर 20 लाख की रंगदारी मांगी।
एसएसपी ने बताया कि रंगदारी न देने पर डॉक्टर और उसके परिवार को डराने के लिए घर पर पन्नेलाल यादव, सतीश व गौतम ने फायरिंग की। संयोग अच्छा था कि गोली गाड़ी पर लगी। 20 सितंबर को जितेंद्र गुप्ता अपने साढ़ू डॉक्टर से फिर रंगदारी की मांग की और रुपये लेकर देवरिया के रुद्रपुर बार्डर के समीप हरैइया झिरझिरवा टोला के पास बुलाया। इस बीच पुलिस टीम लगी हुई थी।
पुलिस को देखते ही बदमाश फायरिंग करते हुए फरार हो गए थे। मगर, मौके पर पुलिस को बदमाशों की एक बाइक मिल गई थी, जिसके नंबर के आधार पर आरोपियों को रविवार को गिरफ्तार कर लिया गया।
ऐसे रची गई थी साजिश
पूरे घटनाक्रम में मुख्य साजिशकर्ता डॉक्टर का साढ़ू जितेंद्र गुप्ता है। उसने ही पूरी घटना की साजिश रची और फिर अंजाम दिया। राकेश निषाद जितेंद्र के घर के पास ही मेडिकल स्टोर चलाता है। इसी की दुकान पर बैठकर पूरी साजिश रची गई थी। यह भी घटना को जानता था और शामिल था।